• जनजातीय धरोहर का उत्‍सव पर हुआ व्‍याख्‍यान
  • जनजातीय नायकों पर आधारित चित्र प्रदर्शनी का हुआ उद्घाटन
  • देश के समृद्ध जन‍जातीय इतिहास को सामने लाने की जरूरत : प्रो. टी.वी. कट्टीमणि

वर्धा, 11 नवंबर 2025 : जी.बी. पंत सामाजिक विज्ञान संस्‍थान, प्रयागराज के अध्‍यक्ष एवं केंद्रीय आदिवासी विश्‍वविद्यालय, आंध्रप्रदेश तथा इंदिरा गांधी राष्‍ट्रीय जनजातीय विश्‍वविद्यालय, अमरकंटक के पूर्व कुलपति प्रो. टी.वी. कट्टीमणि ने कहा कि भारत में जनजातीय समाज के समृद्ध इतिहास को सामने लाने की जरूरत है। जनजातीय समाज में मुक्‍त मानसिकता होने के कारण वे मुक्‍त जीवन जीना चाहते हैं। प्रो. टी.वी. कट्टीमणि महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय में जनजातीय गौरव दिवस के उपलक्ष्‍य में मंगलवार 11 नवंबर को ग़ालिब सभागार में ‘जनजातीय धरोहर का उत्‍सव’ विषय पर आयोजित व्‍याख्‍यान में बतौर मुख्‍य वक्‍ता के रूप में संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम की अध्‍यक्षता कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने की। प्रो. कट्टीमणि ने बिरसा मुंडा के आज़ादी की लड़ाई में योगदान का उल्‍लेख करते हुए कहा कि धरती आबा के नाम से परिचित बिरसा मुंडा जनजातीय गौरव का संकेत है। सामान्‍य परिवार में जन्‍मे बिरसा मुंडा ने अंग्रेजों के खिलाफ आवाज उठायी। भारत सरकार ने उनके त्‍याग और बलिदान के कारण उनके जन्‍म दिवस को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने का निर्णय किया। उन्‍होंने बिरसा मुंडा के साथ-साथ जनजातीय समाज के अन्‍य लोगों के संघर्ष को भी याद किया। उन्‍होंने आदिवासी वाद्य, संगीत, कला, चित्रकारी आदि की चर्चा करते हुए आह्वान किया कि आदिवासी संस्‍कृति को सामने लाने के लिए इन विषयों पर लिखना आवश्‍यक है। आदिवासी भाषाओं की चर्चा करते हुए उन्‍होंने कहा कि हिंदी भाषा के विस्‍तार के लिए आदिवासी का तडका जरूरी है। यदि हम उनकी समृद्ध भाषा, औषधी ज्ञान और पाक-कला आदि पर काम करते हैं तो हम 50 वर्षों तक अपना भविष्‍य बना सकते हैं। उनका कहना था कि आदिवासी अध्‍ययन एक अक्षय पात्र है, जिसपर हमें निरंतर अध्‍ययन करना चाहिए। इससे जनजातियों में जागृति, एकता और शिक्षा को प्रोत्‍साहित किया जा सकता है।

       अध्‍यक्षीय उद्बोधन में कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने कहा कि राष्‍ट्रनिर्माण में आदिवासियों की भूमिका को ठीक से नहीं उठाया गया। हमें हिंदी के विस्‍तार के लिए उनकी भाषाओं पर काम करना चाहिए। आदिवासियों की संस्‍कृति और उत्‍सव हमें उनकी समृद्ध विरासत का परिचय कराते हैं। विकसित भारत के लक्ष्‍य के लिए हमें उनका आदर्श अपनाकर चलना चाहिए। प्रो. कट्टीमणि का स्‍वागत कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने शॉल, विश्‍वविद्यालय का प्रतीक चिन्‍ह एवं सूतमाला देकर किया। अतिथियों द्वारा दीप प्रज्‍ज्‍वलन एवं बिरसा मुंडा के फोटो पर पुष्‍प अर्पित कर अभिवादन किया गया।

     व्‍याख्‍यान से पूर्व जनजातीय नायकों पर आधारित चित्र प्रदर्शनी का उद्घाटन कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा तथा प्रो. टी.वी. कट्टीमणि द्वारा अटल बिहारी वाजपेयी भवन में किया गया। यह प्रदर्शनी 15 नवंबर तक सभी के लिए खुली रहेगी। कार्यक्रम का स्‍वागत भाषण संस्‍कृति विद्यापीठ के अधिष्‍ठाता प्रो. अवधेश कुमार ने किया। संचालन हिंदी साहित्‍य विभाग के  सहायक प्रोफेसर डॉ. सुनील कुमार ने किया तथा कुलसचिव क़ादर नवाज़ ख़ान ने आभार ज्ञापित‍ किया। कार्यक्रम का प्रारंभ कुलगीत से तथा समापन राष्‍ट्रगान से किया गया। इस अवसर पर अध्‍यापक, कर्मचारी, शोधार्थी एवं विद्यार्थी बड़ी संख्‍या में उपस्थित थे।

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