हिंदी स्पीकिंग यूनियन मोरिशस द्वारा आयोजित “काव्य संगम”

हिंदी स्पीकिंग यूनियन द्वारा अप्रवासी घाट ट्रस्ट फंड के सहयोग से आयोजित “काव्य संगम” कवि सम्मेलन का सफल आयोजन 26 फ़रवरी को अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर बीक्रमसिंह रामलाला इंटरप्रीटेशन केंद्र में किया गया।
अप्रवासी घाट के ऐतिहासिक परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम का विशेष प्रतीकात्मक महत्व रहा। यह स्थल भाषा, पहचान और विरासत के गहरे संबंध को रेखांकित करता है तथा पूर्वजों की यात्राओं और भाषा एवं संस्कृति की रक्षा के लिए किए गए निरंतर संघर्ष की सशक्त स्मृति कराता है।
हिंदी कवि सम्मेलन में वरिष्ठ कवि, उभरते रचनाकार, विद्यार्थी तथा हिंदी प्रेमी बड़ी संख्या में सम्मिलित हुए। काव्य-पाठ के माध्यम से मातृभाषा, सांस्कृतिक जड़ें, पहचान, प्रवास और समकालीन सामाजिक यथार्थ जैसे विषयों पर भावपूर्ण अभिव्यक्तियाँ प्रस्तुत की गईं। इन सत्रों ने हिंदी की अभिव्यंजक समृद्धि को उजागर करते हुए मॉरीशस की बहुसांस्कृतिक चेतना का भी सशक्त प्रतिबिंब प्रस्तुत किया।
अपने संदेश में हिंदी स्पीकिंग यूनियन की अध्यक्ष डॉ. अंजलि चिंतामणि ने हिंदी भाषा के संवर्धन में कविता को एक सशक्त साहित्यिक माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि कविता परंपरा और आधुनिक संवेदनाओं के बीच सेतु का कार्य करती है तथा भावनाओं, मूल्यों और सांस्कृतिक चेतना को गहराई से अभिव्यक्त करने में सक्षम है। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं को हिंदी में सृजनात्मक लेखन के लिए प्रोत्साहित किया और रेखांकित किया कि ऐसी साहित्यिक गतिविधियाँ ही भाषा को जीवंत, प्रासंगिक और पीढ़ी-दर-पीढ़ी प्रवाहित बनाए रखती हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि हिंदी स्पीकिंग यूनियन द्वारा पहली बार इस ऐतिहासिक परिवेश में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया, जहाँ कवियों को ऐसे वातावरण में अपनी रचनाएँ प्रस्तुत करने का अवसर मिला जो भाषा और संस्कृति की रक्षा के लिए पूर्वजों के संघर्षों का साक्ष्य है। साथ ही, उन्होंने काव्य संगम जैसे मंचों के माध्यम से साहित्यिक प्रतिभाओं के पोषण और मॉरीशस में हिंदी के प्रचार-प्रसार के प्रति यूनियन की प्रतिबद्धता दोहराई।
कार्यक्रम का एक प्रमुख उद्देश्य युवाओं की साहित्यिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में सहभागिता बढ़ाना भी था। वरिष्ठ कवियों और युवा रचनाकारों के बीच संवाद से मार्गदर्शन, आत्मविश्वास और हिंदी साहित्य के प्रति गहरी रुचि का वातावरण निर्मित हुआ।
हिंदी स्पीकिंग यूनियन और अप्रवासी घाट ट्रस्ट फंड के इस सहयोग की व्यापक सराहना की गई, जिसने साहित्यिक उत्सव को विरासत-बोध के साथ सफलतापूर्वक जोड़ा। यह आयोजन अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस का सार्थक उत्सव सिद्ध हुआ और इस संदेश को सुदृढ़ किया कि भाषाओं का संरक्षण ही संस्कृतियों की निरंतरता का आधार है।
समग्र रूप से, “काव्य संगम” एक स्मरणीय और प्रभावशाली साहित्यिक पहल के रूप में उभरा, जिसने मॉरीशस में हिंदी के प्रचार-प्रसार तथा मातृभाषाओं के संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयासों को और सशक्त किया।

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