वरिष्ठतम कवि एवं प्रेरक डॉ.बालस्वरूप ‘राही’ जी के 90वें जन्मोत्सव पर भव्य अभिनंदन एवं एकल काव्य-पाठ समारोह सम्पन्न

दिनांक : 08/06/2026, विश्व हिंदी सचिवालय, केंद्रीय हिंदी संस्थान, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग परिषद, वातायन तथा भारतीय भाषा मंच के संयुक्त तत्वावधान में वरिष्ठ साहित्यकार एवं बाल-साहित्य के अप्रतिम रचनाकार डॉ. बालस्वरूप राही के 90वें जन्मोत्सव, एकल काव्य-पाठ एवं अभिनंदन समारोह का भव्य आयोजन साहित्य अकादमी, नई दिल्ली के तृतीय तल स्थित सभागार में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के अंगवस्त्र सम्मान से हुआ। कार्यक्रम का संचालन सुश्री अनीता वर्मा (लेखिका, स्थानीय संपादक वैश्विक हिंदी परिवार) ने किया तथा अतिथियों का औपचारिक स्वागत श्री ऋषि कुमार शर्मा (अध्यक्ष, वैश्विक हिंदी परिवार, दिल्ली इकाई) द्वारा किया गया। कार्यक्रम के प्रारम्भ में डॉ.बालस्वरूप राही के जीवन-संघर्ष, साहित्यिक यात्रा तथा रचनात्मक योगदान का परिचय प्रस्तुत किया गया। इसके पश्चात राही जी ने स्वयं अपनी लोकप्रिय बाल कविताओं, गीतों एवं ग़ज़लों का भावपूर्ण पाठ किया। उनकी प्रसिद्ध रचनाओं—“कौन नारियल के पेड़ों पर जादू-सा कर जाता है?”, “बैट पकड़ हाथों में पक्का”, “अगर न होता चाँद”, “जुगनू भाई” तथा “मधुमक्खी कितनी प्यारी तुम” आदि का पाठ सुनकर उपस्थित श्रोता भाव-विभोर हो उठे। उनकी बाल कविताएँ आज भी बच्चों और बड़ों के बीच समान रूप से लोकप्रिय हैं। उल्लेखनीय है कि डॉ.बालस्वरूप राही को उनके साहित्यिक अवदान के लिए वर्ष 2020 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। राही जी के काव्य-पाठ के उपरांत उनकी पुत्री सुश्री गरिमा राही ने अपने पिता के जन्मोत्सव पर एक भावपूर्ण कविता प्रस्तुत की तथा अपनी माता स्वर्गीय पुष्पा जी को स्मरण करते हुए पारिवारिक भावनाओं को साझा किया। सुश्री पूनम भटनागर (पुत्रवधू, बालस्वरूप राही) ने अपने वक्तव्य में कहा कि राही जी ने उन्हें सदैव पुत्री के समान स्नेह और सम्मान दिया। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार वे साहित्य-जगत में कविताओं के सम्राट हैं, उसी प्रकार परिवार में भी प्रेरणा और श्रद्धा के केंद्र हैं। वैश्विक हिंदी परिवार के महानिदेशक विनयशील चतुर्वेदी ने अपने अभिनंदन वक्तव्य में कहा कि उन्होंने राही जी से प्रेरणा लेकर साहित्य-सृजन का मार्ग अपनाया। उन्होंने एक दोहा भी प्रस्तुत किया—

“मस्ती से जीवन जियो, कभी न मानो खेद।

जन्म-मृत्यु के बीच है, एक साँस का भेद॥”

कवि एवं लेखक राजेंद्र राज निगम ने राही जी से जुड़ी अपनी स्मृतियों को साझा करते हुए कहा कि उनका मार्गदर्शन और आशीर्वाद उनके जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने अपनी एक कविता भी प्रस्तुत की। प्रख्यात लेखिका एवं कवयित्री अल्का सिन्हा ने राही जी की सरलता, स्वाभिमान और रचनात्मक व्यक्तित्व की सराहना करते हुए कहा कि किसी भी रचनाकार की सबसे बड़ी पूँजी उसका स्वाभिमान और पाठकों का विश्वास होता है। वरिष्ठ कवि, गीतकार एवं ग़ज़लकार विज्ञान व्रत ने राही जी में ज्ञान, संवेदना और विनम्रता के अद्भुत समन्वय की चर्चा की तथा संस्कृत श्लोकों के माध्यम से उन्हें नमन किया। दोहाकार, ग़ज़लकार एवं गीतकार नरेश शांडिल्य ने राही जी को जन्मदिन की शुभकामनाएँ देते हुए उनकी कर्तव्यनिष्ठा और मानवीय संवेदनाओं को नमन किया। अंतर्राष्ट्रीय सहयोग परिषद के मानक महानिदेशक नारायण कुमार ने अपने वक्तव्य में बताया कि वर्ष 1970 में राही जी से पहली भेंट के बाद उन्हें साहित्य-सृजन की नई प्रेरणा मिली। उन्होंने कहा कि राही जी सदैव नवोदित रचनाकारों को प्रोत्साहित करते रहे हैं और उनके गीतों में सरलता, सहजता तथा गहन संवेदना का अद्भुत संगम दिखाई देता है। अनिल शर्मा ‘जोशी’ ने अपने अभिनंदन वक्तव्य में राही जी के 90वें जन्मोत्सव पर शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि दिल्ली के साहित्यिक समाज में उनके योगदान का विशेष महत्व है। उन्होंने कहा कि राही जी ने कठिन बातों को सरल भाषा में अभिव्यक्त करने की अद्भुत क्षमता विकसित की है और वे हिंदी साहित्य के सबसे महत्वपूर्ण बाल कवियों में से एक हैं। मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित प्रसिद्ध हास्य-व्यंग्य कवि सुरेन्द्र शर्मा ने राही जी को जन्मोत्सव की बधाई देते हुए कहा कि बाल कविता के क्षेत्र में उनका योगदान अद्वितीय है। उन्होंने अपने व्यंग्यपूर्ण अंदाज़ में कविता, समाज और मानवीय मूल्यों पर विचार व्यक्त किए तथा कहा कि कविता का धर्म मनुष्यों को जोड़ना है, उन्हें विभाजित करना नहीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं इंदिरा मोहन ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में राही जी के व्यक्तित्व को प्रकाश, संवेदना और मानवीय मूल्यों का प्रतीक बताया। उन्होंने स्वर्गीय पुष्पा जी को स्मरण करते हुए कहा कि राही जी जैसा व्यक्तित्व दुर्लभ है और उनका स्नेह तथा आशीर्वाद साहित्य-जगत के लिए अमूल्य धरोहर है। संचालक व स्थानीय संपादक वैश्विक हिन्दी पारवार की  अनीता वर्मा ने राही जी को जन्मदिन की शुभकामनाएँ देते हुए उन्हें अपनी प्रेरणा बताया तथा भविष्य में उनके साथ अपने महत्वपूर्ण जीवन-क्षणों को साझा करने की इच्छा व्यक्त की। हरियाणा एवं उत्तर प्रदेश से पधारे अनेक प्रबुद्ध साहित्यकारों और रचनाकारों ने भी अपनी विशिष्ट उपस्थिति दर्ज कर कार्यक्रम की गरिमा में अभिवृद्धि की। इनमें डॉ. मंजु गुप्ता, निशा भार्गव, डॉ. नीलम वर्मा, डॉ. नलिनी भार्गव, मृदुला भटनागर, इन्दु राज निगम, आशमा कौल, ओम सपरा, डॉ. शिव कुमार निगम, श्री सतीश भार्गव, श्री सत्यपाल, डॉ. बरुण कुमार, प्रेम सागर, डॉ. मनीष कुमार तथा अजय शर्मा प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित सभी अतिथियों एवं साहित्यकारों ने बालस्वरूप राही को उपहार एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। अंत में डॉ. शिवम शर्मा (राजभाषा विभाग, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय) ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए राही जी, मुख्य अतिथि, अध्यक्ष, विशिष्ट अतिथियों, वक्ताओं, श्रोताओं तथा आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम अत्यंत गरिमामय, भावपूर्ण एवं साहित्यिक ऊष्मा से परिपूर्ण रहा। उपस्थित साहित्यकारों ने बालस्वरूप राही के दीर्घायु, स्वस्थ एवं सक्रिय जीवन की मंगलकामना करते हुए उनके साहित्यिक योगदान को नमन किया।

रिपोर्ट : अजय शर्मा

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