‘बीपीए फाउंडेशन एवं इंडिया नेटबुक्स’ के संयुक्त तत्वाधान में “साहित्यकार सम्मानोत्सव – 2026” का भव्य आयोजन

पूर्वी दिल्ली के मयूर विहार स्थित होटल क्राउन प्लाजा के सभागार में “बीपीए फाउंडेशन एवं इंडिया नेटबुक्स” के संयुक्त तत्वाधान में “साहित्यकार सम्मानोत्सव – 2026” का भव्य आयोजन किया गया।
मंचासीन अन्य गणमान्य विभूतियों में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश श्री एस एन श्रीवास्तव, सुप्रसिद्ध वरिष्ठ साहित्यकार एवं कवि श्री गिरीश पंकज, सुप्रसिद्ध वरिष्ठ गीतकार एवं साहित्यकार डॉ बुद्धिनाथ मिश्र, व्यंग्य-यात्रा पत्रिका के संस्थापक-संपादक एवं सुप्रसिद्ध व्यंग्यकार डॉ प्रेम जनमेजय, सुविख्यात वरिष्ठ साहित्यकार श्रीमती ममता कालिया, जासूसी नाटकों के सुप्रसिद्ध सृजनकर्ता श्री सुरेन्द्र मोहन पाठक, वरिष्ठ साहित्यकार श्री बलदेव भाई शर्मा, विश्व रंग संस्था के संस्थापक अध्यक्ष, वरिष्ठ साहित्यकार एवं टैगोर विश्वविद्यालय के उपकुलपति डॉ संतोष चौबे तथा फ़िल्म एवं नाट्य समीक्षक श्री संदीप अवस्थी उपस्थित रहे। संचालन के दायित्वों का निर्वहन श्री रणविजय राव, श्रीमती पूनम माटिया एवं डॉ लालित्य ललित ने संयुक्त रूप से अपनी-अपनी निर्धारित जिम्मेदारियों के क्रमानुसार और समयानुसार कुशलतापूर्वक किया। कार्यक्रम के संयोजक एवं निवेदक की भूमिका का वहन संस्थापक एवं वरिष्ठ साहित्यकार डॉ संजीव कुमार, प्रबंध न्यासी एवं इंडिया नेटबुक्स की निदेशक डॉ मनोरमा तथा न्यासी श्रीमती कामिनी मिश्रा ने संयुक्त रूप से किया।
समारोह का आरंभ मंचासीन विभूतियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। तत्पश्चात्, मंचासीन गणमान्य विभूतियों को माल्यार्पण, अंगवस्त्र ओढ़ाकर एवं पुष्पगुच्छ भेंट स्वरूप प्रदान करके सम्मानित किया गया। इसी क्रम में कथक शिरोमणि डॉ शोभना नारायण की शिष्या नृत्यांगना सुश्री सुपर्णा सिंह द्वारा कथक नृत्य के माध्यम से मां सरस्वती की वंदना में प्रस्तुति के साथ कार्यक्रम को गतिमान किया गया।
अपने आरंभिक उदबोधन में डॉ संजीव कुमार ने दोनों संस्थाओं के अंतर्गत किए जाने वाले कार्यकलापों एवं निर्णायक समिति द्वारा चयनित सम्मानित विभूतियों के चयन-प्रक्रिया पर दृष्टिगोचर प्रस्तुत करते हुए इन संस्थानों के अंतर्गत किए जाने वाले कार्यकलापों एवं विभिन्न विधाओं के क्षेत्रों में नवीन धरातलीय परिप्रेक्ष्यों में रिसर्च के माध्यम से उन्हें प्रत्यक्ष रूप में अमली-जामा पहनाने और उन विधाओं में नवांकुर सृजनकर्ताओं को निरंतर प्रोत्साहित करने हेतु ऐसे आयोजनों पर विस्तृत जानकारी से उपस्थित जनसमुदाय को अवगत कराया।
तत्पश्चात्, संचालक एवं संचालिका द्वारा क्रमबद्ध तरीके से मंचासीन गणमान्य विभूतियों के परिचय-पत्रक का वाचन किए जाने के पश्चात् उन्हें अपने-अपने उदगारों के लिए आमंत्रित किया गया।
श्री संदीप अवस्थी ने अपने उदबोधन में संस्थाओं द्वारा भविष्य में क्रियान्वित की जाने वाली कुछ महत्त्वपूर्ण गतिविधियों को रेखांकित करते हुए उपस्थित जनसमूह का ज्ञानार्जन पश्चात् मंच पर अपना स्थान ग्रहण किया।
श्री सुरेन्द्र मोहन पाठक ने अपने अतिसंक्षिप्त संबोधन में उन्होंने अपनी रचनाधर्मिता तथा उसके कुछ चुनिंदा बिंदुओं पर स्पष्टीकरण सहित उसे पूर्णता प्रदान की।
डॉ प्रेम जनमेजय ने अपने सारगर्भित दृष्टिगोचर में अवगत कराया कि संस्थाओं द्वारा किए जाने वाले आयोजन का आज यह पांचवां संस्करण है। प्रारंभ से मैं भी संजीव भाई के साथ हूं और उनकी कर्मठता और ऊर्जा को नमन करता हूं। साथ ही, व्यंग्य-यात्रा के कुछ महत्त्वपूर्ण पक्षों को उनकी उपलब्धियों सहित रेखांकित करने के अपनी वाणी को विराम दिया।
सेवानिवृत्त न्यायाधीश एस एन मिश्रा ने अपने आपको इस मुहिम से संबंध किए जाने हेतु धन्यवाद और आभार व्यक्त करते हुए कहा कि हिन्दी साहित्य जगत की विभिन्न विधाओं के विभिन्न स्तरों के सृजनकर्ताओं तथा सामाजिक क्षेत्रों में कार्यशील कर्मियों को चिंहित करके सम्मानित किया जाना बहुत ही श्रेष्ठ और सामाजिक सेवार्थ किया गया कार्य है। इसका साक्षी बनने पर स्वयं को सौभाग्यशाली मानता हूं।
डॉ बुद्धिनाथ मिश्र ने अपने वक्तव्य में उद्धरित करते हुए बताया कि डॉ संजीव कुमार बहुत ही उत्तम कार्य कर रहे हैं। मैंने भी अपनी योजनाओं संबंधित जानकारियां उनसे साझा की हैं, जिन्हें भविष्य में जल्द ही क्रियान्वित किया जाएगा। उन्होंने अपना एक शेर सुनाया तथा अपने श्रेष्ठ गीत “तुम इतने समीप आओगे सुनाया…….” की सुरम्य प्रस्तुति के साथ अपनी वाणी को विराम दिया।
डॉ संतोष चौबे ने अपनी व्यक्तिगत साहित्यिक तथा विश्व रंग संस्था द्वारा समय-समय पर देश-विदेश में आयोजित की जाने वाली गतिविधियों को विस्मृतियों से उकेरकर रेखांकित करते हुए अवगत कराया कि किस प्रकार हमारा और आपका दायरा समयानुसार आकार लेता रहता है, जिसके लिए आपसी वार्तालाप बहुत आवश्यक है। वैश्विक पटल पर भी बहुत-सी विभूतियों, संस्थानों एवं संस्थाओं से अभी तक जुड़ने के साथ-साथ उनमें सहभागिता हेतु उपस्थित रहा हूं। पिछले वर्ष भी मुझे सम्मानित किया गया था, किंतु मैं उपस्थित नहीं हो सका था। इस वर्ष पुनः मुझे यह अवसर प्रदान किया गया है। यहां आने पर स्वत: देखकर मैंने डॉ संजीव कुमार से कुछ योजनाओं को प्रत्यक्ष रूप में क्रियान्वित करने के लिए विचार-विमर्श किया है। जल्द ही उन्हें आकार प्रदान करके आप सभी के समक्ष उपस्थित किया जाएगा। इन्हीं शब्दों से उन्होंने मंच पर अपना स्थान ग्रहण किया।
श्री बलदेव भाई शर्मा ने अपने समय की स्मृतियों से उकेरकर कुछ उदाहरण प्रस्तुत करते हुए इस आयोजन की श्रेष्ठता और समसामयिक उपलब्धि को रेखांकित करते हुए अपनी वाणी को विराम दिया।
तत्पश्चात्, आज के आयोजन की प्रमुख गतिविधि “साहित्यकार सम्मानोत्सव – 2026” का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर समस्त सम्मानित साहित्यकारों, शिक्षाविदों एवं समाजसेवा समर्पित विभूतियों को साफा बांधकर, अंगवस्त्र ओढ़ाकर, माल्यार्पण पहनाकर तथा स्मृति-चिन्ह प्रदान करके सम्मानित किया गया। सभी अलंकृत विभूतियों के अलंकरण श्रेणी सहित नाम इस प्रकार हैं:-
अति विशिष्ट साहित्य विभूषण सम्मान – वरिष्ठ साहित्यकार श्री केशुभाई देसाई, चिकित्सक एवं साहित्य सृजनकर्ता डॉ श्याम सखा श्याम एवं विश्व रंग के संस्थापक अध्यक्ष एवं टैगोर विश्वविद्यालय के उपकुलपति डॉ संतोष चौबे।
साहित्याचार्य विभूषण सम्मान –डॉ रमा एवं राकेश कुमार (दिल्ली), रानी श्रीवास्तव (गुरुग्राम), डॉ राकेश कुमार शुक्ला (कानपुर), डॉ पद्मा शर्मा (ग्वालियर), डॉ अरुण शुक्ल (जबलपुर), डॉ संदीप अवस्थी एवं डॉ शीतला प्रसाद महेन्द्र (अजमेर), डॉ दीपा गुप्ता (अल्मोडा), डॉ पानसिंह (लुधियाना), रीता राम दास (मुम्बई), डॉ अर्जुन चव्हान (कोल्हापुर), डॉ रेशमा अंसारी एवं सुधीर शर्मा (रायपुर), सुनीता अवस्थी एवं डॉ इन्द्रा वीरेंद्र (जामिया), डॉ वृषाली मेडरेकर (गोवा) तथा डॉ राजश्री शुक्ला (कोलकता)।
राजभाषा विभूषण सम्मान – चन्द्रमोहन।
प्रेम शंकर शुक्ल थ्रिलर साहित्य विभूषण सम्मान – सुरेन्द्र मोहन पाठक।
युवा रत्न सम्मान – शांतनु ओम गुप्ता।
इंडिया नेटबुक्स साहित्यभूषण सम्मान:-
कविता – ममता किरण, मीनू मीना सिन्हा एवं डॉ उपासना दीक्षित।
ग़ज़ल – कविता विकास, वीना उदय कुमार।
उपन्यास – शशि काण्डपाल, प्रबोध गोविल।
कहानी – योगिता यादव।
लघुकथा –वीना विज।
नाटक – जयवर्धन।
व्यंग्य – बी.एल.आच्छा।
अनुवाद –पंकजदर्शी एवं प्रतिभा मुद्लियार।
बालसाहित्य – सुधा गुप्ता एवं डॉ शकुंतला कालरा।
आध्यात्मिक साहित्य – आनंद सिंह।
प्रवासी साहित्य –अरुण सब्बरवाल।
पत्रकारिता – प्रदीप कुमार।
समालोचना – स्व॰ विजय कुमार तिवारी।
आत्मकथा – डॉ सविता चड्ढा।
कथेतर – अशोक ओमरे।
बहुविधा साहित्य – संतोष खन्ना।
कला – सुपर्णा सिंह।
अनुस्वार रत्न – डॉ पिलकेंद्र अरोड़ा।
कथाबिंब – सिद्देश्वर।
विधि नायक – आयुष शुक्ल।
बीपीए समाज सेवा सम्मान – जय भगवान सिंगला एवं आरती शर्मा।
सूर्य कुमार शर्मा वामा रत्न एवार्ड – शंकुतला मित्तल एवं उमंग सरीन (एनसीआर चैप्टर)।
साथ ही, दोनों संस्थाओं से संबंधित कर्मचारियों को स्मृति-चिन्ह एवं अनुदान राशि प्रदान करते हुए सम्मानित करते हुए उनके कार्यक्रम को वर्तमान मूर्त रूप में संयोजन और नियोजन के प्रति समर्पण भाव से भरपूर समर्पित योगदान की भूरि-भूरि प्रशंसा परिपूर्ण आशीर्वचनों से भी आच्छादित किया गया।
श्रोता-दीर्घा में उपस्थित देश-विदेश के विभिन्न शहरों तथा साहित्य, शिक्षा एवं सामाजिक क्षेत्रों से उपस्थित रहे प्रमुख हस्ताक्षरों में सुभाष चन्दर, त्रिलोक दीप, प्रताप सहगल, शशि सहगल, आशा कुंद्रा, राजेश्वरी मंडोरा, प्रोफेसर राजेश कुमार, डॉ कल्पना पाण्डेय ‘नवग्रह’, ओमप्रकाश प्रजापति, नंद भारद्वाज, डॉ लीलाधर मंडलोई, स्नेहा देव, कमलेश पाठक, आरती शर्मा, मनीषा चौगांवकर, कल्पना मनोरमा, अशोक चव्हाण तथा कुमार सुबोध इत्यादि उल्लेखनीय हैं।
कार्यक्रम के अंतिम पड़ाव पर इस अवसर पर देश-विदेश के विभिन्न शहरों और क्षेत्रों से पधारे सभी विद्वतजनों, प्रबुद्धजनों एवं आगंतुकों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए धन्यवाद और आभार ज्ञापित करने के साथ यह भव्य आयोजन सम्पन्न हुआ।
इस अवसर पर मेरे द्वारा लिए गए कुछ चित्र एवं वीडियो आप सभी के अवलोकनार्थ यहां प्रस्तुत हैं।
रिपोर्ट — कुमार सुबोध

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