दिनांक 21.04.2026 को पूर्वी दिल्ली के निर्माण विहार मेट्रो स्टेशन के निकट स्थित पीएसके क्लब के सभागार में श्री आदिशंकराचार्य जयंती महोत्सव का भव्य आयोजन सम्पन्न।

दिनांक 21.04.2026 को आदि शंकराचार्य जनसेवा ट्रस्ट द्वारा पूर्वी दिल्ली सांस्कृतिक केंद्र में भगवत्पाद जगतगुरु आदि शंकराचार्य जयंती का भव्य आयोजन किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता आनंद पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर अनंत श्री विभूषित श्री श्री 1008 श्री स्वामी बालकानंद गिरी जी महाराज के पावन सानिध्य से रही। निजस्वरूपानंद दाती महाराज, महामंडलेश्वर विद्यागिरी महाराज, महामंडलेश्वर हरि ओम गिरी महाराज, शिवप्रेमानन्द जी की मंच पर उपस्थिति के साथ सभागार में बड़ी संख्या में पूज्य संत-महात्मा पधारे। जगतगुरु आदि शंकराचार्य को सन्यास परम्परा, पीठों व अखाड़ों का निर्माता माना जाता है, इसलिये सन्त परम्परा में उनका अत्यंत गौरवशाली स्थान है।
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रसिद्ध गायक डॉ शुभम आर्या ने आदि शंकराचार्य की कृतियों “शिवोहम शिवोहम” (“निर्वाण षट्कम”) तथा “भज गोविंदम” की संगीतमय प्रस्तुतियों का सुमधुर वाणी में गायन के माध्यम से सभागार में उपस्थित जनसमुदाय को मंत्रमुग्ध करते हुए उन्हें गड़गड़ाती करतल-ध्वनि से वातावरण को गुंजायमान करने पर बाध्य कर दिया।
दीपप्रज्वलन के पश्चात् लालबहादुर शास्त्री विश्वविद्यालय के डॉ विनोद शर्मा, प्रसिद्ध शिक्षाविद् डॉ आलोक कुमार मिश्रा के व्याख्यान से आदि शंकराचार्य के महान दर्शन के विषय में महत्त्वपूर्ण जानकारी प्रदान की गई। दिल्ली प्राच्यविद्या प्रतिष्ठान के निदेशक एवं संस्कृत अकादमी के पूर्व अध्यक्ष डॉ जीतराम भटट ने आचार्य शंकर की दिग्विजय यात्रा का वर्णन करते हुए बताया कि किस प्रकार उन्होंने पूरे देश का भ्रमण करके सभी को एक सूत्र में पिरोया। पूर्व-पश्चिम व उत्तर-दक्षिण के लोगों एवं सम्प्रदायों को एकरूप किया।
अद्वैत वेदांत के विशेषज्ञ प्रोफेसर डॉ रामनाथ झा द्वारा अपने मुख्य वक्तव्य में आचार्य शंकर की कई कृतियों पर प्रकाश डालते हुए अद्वैत दर्शन की प्रासंगिकता को प्रस्तुत किया गया।
32 वर्षों की अल्पायु के जीवनकाल में अपनी जन्मस्थली केरल के कालडी से निकलकर समस्त भारतवर्ष के सुदूर शहरों और क्षेत्रों का भ्रमण करते हुए अद्वैत वेदान्त एवं भाष्यों की टीकाओं को प्रतिपादित करने के माध्यम से संपूर्ण राष्ट्र को एकता के सूत्र में पिरोने का सतत् महान कार्य किया, जिसके लिए हम सभी उनके प्रति सदैव कृतज्ञ रहेंगे।
उनके वक्तव्य को सुनने के लिये विभिन्न विश्वविद्यालय के शोधार्थियों तथा शिक्षकगणों की सभागार में उपस्थिति उनके द्वारा आदि शंकराचार्य पर किए गए गहन शोध को दर्शाती है।
आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी बालकानंद गिरी जी महाराज ने भी अपने अध्यक्षीय संबोधन में आदि शंकराचार्य के अद्वैत वेदांत, भाष्यों, टीकाओं, दृष्टांतों एवं सिद्धांतों पर ध्यानाकर्षण प्रकरण प्रस्तुत करते हुए चार पीठों के अपने-अपने ब्रह्म वाक्यों की संक्षेप में सूत्रों के द्वारा विवेचनात्मक टीका-टिप्पणी की।
इस अवसर पर ट्रस्ट द्वारा प्रत्येक वर्ष प्रदान किए जाने वाले “आदिशंकराचार्य सम्मान” के प्रारंभ की नींव को परंपरा के रूप में भविष्य को संज्ञान में लेते हुए इस वर्ष का यह प्रथम सम्मान प्रो• रामनाथ झा को मंचासीन गणमान्य विभूतियों के कर-कमलों द्वारा स्मृति-चिन्ह प्रदान करके सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का प्रभावी मंच संचालन का निर्वहन आकाशवाणी-दूरदर्शन कलाकार व लेखक कुमार सुबोध शर्मा ने किया। संचालक ने कार्यक्रम की रूपरेखा को रेखांकित करते हुए दृष्टिगोचर के माध्यम से अवगत कराया कि आज हम सभी जगदगुरू श्री आदिशंकराचार्य जयंती के पावन अवसर पर यहां एकत्रित हुए हैं और उनके कार्यों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए जन-मानस को ट्रस्ट से जुड़ना चाहिए।
इस महोत्सव के अवसर पर पधारे संत-महात्माओं में परम पूजनीय स्वामी सतीश दास जी महाराज, स्वामी सुरेंद्र नाथ अवधूत जी महाराज, स्वामी श्याम गिरी जी महाराज, स्वामी नानक दास जी महाराज, स्वामी निजस्वरूपानंद दाती जी महाराज, स्वामी सीता पुरी जी महाराज, स्वामी दौलत गिरी जी महाराज, स्वामी ओम प्रकाश गिरी जी महाराज, स्वामी गिरिजा नंद जी महाराज, स्वामी मंगल दास जी महाराज, स्वामी भोला गिरी जी महाराज, स्वामी मंगल दास उदासीन जी महाराज, चंद्रदेव जी महाराज, परम पूजनीय अरूंधति गिरी जी, थाना पति मिथलेश गिरी जी महाराज, नागा देव गिरी जी महाराज, महंतश्री करूणा नन्द गिरी जी महाराज तथा देश के विभिन्न शहरों और क्षेत्रों से पधारे प्रबुद्धजनों, विद्वतजनों एवं धर्मप्रेमी सभ्यजनों में अशोक गुप्ता, अनुराग गुप्ता, अशोक कुमार गुप्ता, बलदेव गुप्ता, बासुदेव गर्ग, घनश्याम जवेरी, राजेन्द्र मोहन वशिष्ठ, रजत रस्तोगी, एस के नायर, शिल्पी गुप्ता, सुनील सूरी, तारा चंद तायल, अनीता वर्मा सेठी, डॉ नीलम वर्मा इत्यादि प्रमुख उल्लेखनीय हस्ताक्षर रहे।
कार्यक्रम के अंतिम पड़ाव पर ट्रस्ट के संस्थापक अध्यक्ष दीपक गुप्ता अपने सहयोगियों महेश हिंगोरानी, वासुदेव बंसल, अरविंद कुमार, राजकमल शर्मा, प्यारे कृष्ण गड़रू, विनोद सिंघल, दीपक अग्रवाल, प्रदीप गर्ग, लज्जावती गुप्ता, कुमार सुबोध शर्मा इत्यादि के सराहनीय योगदान की प्रशंसा करते हुए कार्यक्रम की सफलता का श्रेय उन्हें प्रदान किया। उन्होंने अपने समापन उदबोधन के द्वारा सभागार में उपस्थित सभी संत-महात्माओं, प्रबुद्धजनों, विद्वतजनों एवं धर्मप्रेमी सभ्यजनों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए धन्यवाद और आभार ज्ञापित करने के पश्चात् यह भव्य आयोजन सम्पन्न हुआ।
रिपोर्ट — कुमार सुबोध,

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