‘डायस्पोरा से संवाद’ विषय पर बौद्धिक विमर्श ( डॉ विजय मेहता, प्रख्यात लेखक एवं हृदय रोग विशेषज्ञ )

दिनांक 21/4/2026 (मंगलवार) राजधानी के आई.टी.ओ. स्थित दीनदयाल उपाध्याय मार्ग पर ‘डायस्पोरा से संवाद’ विषय पर एक भव्य बौद्धिक विमर्श का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन अंतरराष्ट्रीय सहयोग परिषद, विश्व हिंदी समिति, लिपि परिषद और वैश्विक हिंदी परिवार के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य प्रवासी भारतीयों के साथ भाषाई और सांस्कृतिक संबंधों को सुदृढ़ करना था।

समारोह के मुख्य अतिथि और मुख्य वक्ता डॉ. विजय मेहता रहे, जो अमेरिका में ‘अखिल विश्व हिंदी समिति’ के अध्यक्ष होने के साथ-साथ एक प्रख्यात लेखक और हृदय रोग विशेषज्ञ भी हैं। डॉ. मेहता ने कार्यक्रम में उपस्थित प्रश्नकर्ताओं का जिज्ञासा समाधान किया, साथ ही अपने वक्तव्य में उन्होंने कहा कि ‘संप्रदायों की प्रतिस्पर्धा के कारण ऐतिहासिक मूल्यों का ह्रास हुआ है,’ और अपने प्रतिनिधि कविता संग्रह से ‘राम तुम्हें आना ही होगा’, ‘बजा कन्हैया आज बांसुरी’ और ‘नवयुग के नूतन नगर बोल’ नामक कविता सुनाई। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ लेखक एवं समाजसेवी डॉ. बी.एल. गौड़ ने की। गौड़ जी ने अपनी कुछ रूबाइयां सुनाई। चर्चा को गहराई प्रदान करने के लिए वक्ता के रूप में श्री नारायण कुमार, श्री श्याम परांडे, श्री अनिल जोशी और श्री हरिसिंह पाल जैसे प्रबुद्ध व्यक्तित्व उपस्थित रहे। श्री अनिल जोशी जी ने कहा कि ‘मेहता जी हृदय रोग विशेषज्ञ होने के साथ-साथ साहित्य की जो मशाल अमेरिका में जलाई है वह सचमुच प्रशंसनीय है।’ श्री श्याम परांडे जी ने अपने वक्तव्य में विवेकानंद जी की बात से अपनी बात शुरू करते हुए कहा कि ‘विश्व के पटल से भारत का मैप हटा दीजिए तो जो बचेगा वो गंध होगी।’

दिल्ली विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर सुशील कुमार द्विवेदी ने इस संवाद में ‘संवादी’ की भूमिका निभाई, जिससे चर्चा के शैक्षणिक और व्यावहारिक पक्षों के बीच एक सार्थक संतुलन बना रहा। कार्यक्रम का सफल प्रबंधन और संयोजन श्री गोपाल अरोड़ा, श्री सुमित्रा और श्री रूदेश कुमार की टीम द्वारा किया गया। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक स्तर पर हिंदी न केवल एक भाषा है, बल्कि प्रवासी भारतीयों को उनकी जड़ों से जोड़ने वाला एक सशक्त सेतु भी है। कार्यक्रम में दिल्ली विश्वविद्यालय के सहायक आचार्य, शोधार्थी एवं दिल्ली के विविध कार्यक्षेत्रों के विद्वान उपस्थित रहे।

रिपोर्ट :- अदिति शुक्ला

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