‘भारतीय भाषा संगम 2.0’ के उद्घाटन-सत्र का भव्य शुभारंभ

देशभर के भाषाविदों, साहित्यकारों, शोधकर्ताओं एवं भाषा-प्रेमियों को एक साझा मंच प्रदान करने के उद्देश्य से भारतीय भाषा संगम 2.0 का आयोजन एकता नगर, केवड़िया में किया गया। यह आयोजन भारतीय भाषाओं के संरक्षण, संवर्धन तथा उनके माध्यम से सांस्कृतिक एकीकरण को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिससे “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की भावना स्पष्ट रूप से परिलक्षित हुई।
कार्यक्रम का शुभारंभ भारतीय भाषा संगम के गीत पर विभिन्न क्षेत्रों के रंगकर्मियों द्वारा प्रस्तुत आकर्षक नृत्य से हुआ। इस सांस्कृतिक प्रस्तुति ने भारतीय विविधता और सांस्कृतिक समृद्धि का सुंदर चित्र प्रस्तुत करते हुए उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके पश्चात मंचासीन अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर भाग्येश झा (अध्यक्ष, गुजरात साहित्य अकादमी), गजेंद्र सिंह शेखावत (केंद्रीय मंत्री, संस्कृति मंत्रालय), अतुल कोठारी (राष्ट्रीय सचिव, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास), जयेंद्र शाह (सचिव, गुजरात साहित्य अकादमी) एवं राजेश्वर जी (राष्ट्रीय संयोजक, भारतीय भाषा मंच) सहित अन्य विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
दीप प्रज्वलन के पश्चात जयेंद्र शाह जी ने स्वागत उद्बोधन प्रस्तुत किया। उन्होंने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं आयोजकों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। इस दौरान अतिथियों का शॉल एवं प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया गया, जो भारतीय परंपरा के अनुरूप आदर एवं सम्मान का प्रतीक है।
इसके उपरांत राजेश्वर जी ने कार्यक्रम की भूमिका प्रस्तुत करते हुए भारतीय भाषाओं के महत्व को ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य में स्पष्ट किया। उन्होंने महात्मा गांधी के उस विचार का उल्लेख किया कि भारत की आत्मा गांवों में बसती है, तथा सरदार वल्लभभाई पटेल द्वारा स्वतंत्रता के पश्चात रियासतों के एकीकरण को केवल राजनीतिक ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक एकीकरण भी बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय भाषा संगम 2.0 इसी सांस्कृतिक एकात्मता को सुदृढ़ करने का एक सशक्त प्रयास है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि इस आयोजन में लगभग 40 भारतीय भाषाओं के प्रतिनिधि तथा करीब 300 प्रतिभागी सम्मिलित हुए हैं।
उन्होंने प्रतिभागियों को तीन प्रमुख वर्गों में विभाजित करते हुए बताया कि इसमें एक वर्ग ऐसे विद्वानों का है जो भाषाओं पर गंभीर चिंतन और शोध कार्य करते हैं; दूसरा वर्ग उन संस्थानों का है जो भारतीय भाषाओं, ज्ञान परंपरा, संस्कृति और साहित्य के प्रचार-प्रसार में सक्रिय हैं; तथा तीसरा वर्ग ऐसे व्यक्तियों और समूहों का है जो विभिन्न माध्यमों से स्वतंत्र रूप से भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन में निरंतर कार्यरत हैं। उन्होंने आगे बताया कि कार्यक्रम के अंतर्गत विभिन्न विषयों पर कई सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें गहन विमर्श और विचार-विनिमय होगा।
इसके पश्चात गुजरात साहित्य अकादमी द्वारा भारतीय भाषा संगम के संदर्भ में एक संक्षिप्त प्रस्तुति (मित्र चित्र) प्रस्तुत की गई, जिसमें इस पहल के उद्देश्यों, गतिविधियों एवं उपलब्धियों का परिचय दिया गया।
कार्यक्रम के क्रम में गुजरात साहित्य अकादमी के अध्यक्ष भाग्येश झा ने अपने उद्बोधन में कार्यक्रम की महत्ता और प्रेरणा पर प्रकाश डाला। उन्होंने देश के विभिन्न भागों से आए सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए भारतीय भाषाओं के संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।
इसके उपरांत मंचासीन अतिथियों द्वारा दो महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन किया गया। इनमें प्रमुख रूप से “भारतीय भाषा: चुनौतियां एवं संभावनाएं” पुस्तक शामिल रही, जो वर्तमान परिप्रेक्ष्य में भारतीय भाषाओं के सामने उपस्थित चुनौतियों और उनके समाधान की संभावनाओं पर केंद्रित है।
अतुल कोठारी जी ने अपने अतिथि वक्तव्य में कहा कि इस मंच पर “लघु भारत” का सजीव स्वरूप देखने को मिलता है, जहां विभिन्न भाषाएं, संस्कृतियां और परंपराएं एक साथ उपस्थित हैं। उन्होंने इस आयोजन को सफल और सार्थक बनाने के लिए सभी प्रतिभागियों के सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया।
अंत में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत जी ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में भारतीय संस्कृति और भाषाओं के गहरे संबंध पर प्रकाश डाला। उन्होंने अपने प्रभावशाली और सहज शैली में कहा कि भाषा वह माध्यम है जिसके माध्यम से संस्कृति और सभ्यता जीवित रहती है और पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ती है। उन्होंने भारतीय साहित्य की लिखित एवं श्रुति परंपरा का उल्लेख करते हुए इसे देश की अमूल्य धरोहर बताया। उनके प्रेरणादायक एवं विचारोत्तेजक संबोधन ने उपस्थित सभी श्रोताओं को गहराई से प्रभावित किया।
इस प्रकार उद्घाटन सत्र अत्यंत सफल, प्रभावशाली एवं प्रेरणादायक रहा। इसने भारतीय भाषाओं के संरक्षण, संवर्धन और उनके माध्यम से राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने का एक सशक्त संदेश दिया तथा आगामी सत्रों के लिए सकारात्मक और उत्साहपूर्ण वातावरण तैयार किया।
उद्घाटन सत्र में श्री अनिल जोशी (अध्यक्ष,वैश्विक हिन्दी परिवार), श्री बरुन कुमार, श्री ऋषि कुमार शर्मा (अध्यक्ष,दिल्ली प्रांत,वैश्विक हिन्दी परिवार), डॉ. सुमित कुमार मीणा (विश्वविद्यालय संयोजक,वैश्विक हिन्दी परिवार), डॉ. शिवम शर्मा, डॉ. प्रखर शर्मा एवं विभिन्न प्रांतों के प्रतिनिधि के रूप में प्रो. रवि टेकचन्दानी (अध्यक्ष,भारतीय भाषा विभाग,दिल्ली विश्वविद्यालय), सुश्री स्वरांगी साने (महाराष्ट्र), प्रो. सोमा बंधोपाध्याय (बंगाल), डॉ. किरण खन्ना (पंजाब) की विशेष उपस्थिति मौजूद रही।

रिपोर्ट – डॉ. शिवम शर्मा
