वियतनाम में आयोजित 24वें साहित्यिक महोत्सव में गूँजी हिन्दी की स्वरधारा

दिनांक 19.06.2026 से दिनांक 23.06.2026 के मध्य वियतनाम के ‘हो ची मिन्ह’ शहर में स्थित डायमंड हिल होटल के सभागार में अखिल भारतीय सर्वभाषा संस्कृति समन्वय समिति के तत्वावधान में 24वें साहित्यिक महोत्सव का आयोजन किया गया। दक्षिणी वियतनाम के मध्य में सैगोन नदी के किनारे स्थित होने की वजह से “हो ची मिन्ह शहर (हो ची मिन्ह)” को ‘साइगोन’ के नाम से जाना पहचाना जाता था। यह दक्षिण-पूर्व एशिया में वियतनाम के इस सबसे बड़ा शहर को वर्ष 1975 से पहले यह दक्षिण वियतनाम की राजधानी का अस्तित्व प्राप्त था। यह वियतनाम का एक महत्त्वपूर्ण और प्रमुख आर्थिक, वित्तीय और परिवहन केंद्र है। पर्यटन की दृष्टि से भी यह शहर अपने शानदार इतिहास, फ्रेंच औपनिवेशिक वास्तुकला, संग्रहालयों के साथ-साथ अपनी हलचल भरी नाइटलाइफ़ के लिए भी प्रसिद्ध है। कार्यक्रम की अध्यक्षता का दायित्व प्रज्ञान विश्वम पत्रिका के संस्थापक, संपादक एवं वरिष्ठ गज़लकार पंडित सुरेश नीरव के सशक्त हाथों में रहा। मुख्य अतिथि के तौर पर भारतीय सैन्य सेवा मेडल से सम्मानित सेवानिवृत्त मेजर कर्नल अनूप कुमार विराजमान रहे। अन्य मंचासीन गणमान्य विभूतियों में वरिष्ठ साहित्यकार ज्ञान चंद मर्मज्ञ, इंडिया नेटबुक्स के चेयरपर्सन, भारतीय सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता एवं वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. संजीव कुमार तथा नेत्र विशेषज्ञ एवं साहित्यकार डॉ. प्रकाश उपाध्याय ने अपना सानिध्य प्रदान किया। कार्यक्रम के संचालन का निर्वहन प्रसिद्ध कवयित्री एवं कुशल संचालिका डॉ. राखी सिंह कटिहार ने किया। कार्यक्रम का शुभारंभ समृद्ध मंच के दोनों ओर विराजित देश-विदेश के विभिन्न शहरों एवं क्षेत्रों से पधारकर सम्मिलित हुए प्रबुद्धजनों एवं विद्वतजनों द्वारा समवेत स्वर में गायत्री मंत्र के वाचन से किया गया। तत्पश्चात्, प्रवासी कवयित्री एवं ‘स्वर कोकिला’ उपनाम से पहचानी जाती मीरा नायर ने अपने सुमधुर स्वर में पं. सुरेश नीरव की वियतनाम पर स्वरचित एवं मौलिक नवीनतम कविता ‘यह वियतनाम नाम है..….’ का सुरमई अंदाज में प्रस्तुतिकरण करके कार्यक्रम को गतिमान बनाया। तदोपरांत, पं. सुरेश नीरव ने अपने आरंभिक उदबोधन के माध्यम से अवगत कराया कि वियतनाम में आज तक हिन्दी का कोई कार्यक्रम आयोजित नहीं किया गया है। इस दिशा में यह हमारा प्रथम प्रयास है। उन्होंने संस्था की गतिविधियों एवं उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए उससे संबंधित कुछ महत्त्वपूर्ण जानकारियों को साझा किया। यही नहीं, आज के महोत्सव के दौरान डॉ. प्रकाश उपाध्याय के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर केंद्रित प्रज्ञान विश्वम के अंक का लोकार्पण भी मंचासीन गणमान्य विभूतियों के कर-कमलों द्वारा किया गया। संस्था के आनलाइन पटल के माध्यम से भी इस आयोजन को प्रसारित एवं प्रदर्शित किया गया, जिसमें देश-विदेश के विभिन्न शहरों से हिन्दी साहित्य जगत की विविध विधाओं के सशक्त रचनाकारों एवं रस प्रेमियों ने अपनी सहभागिता दर्ज कराई। अगले क्रम में सुप्रसिद्ध कथक नृत्यांगना एवं छत्तीसगढ़ राज्य के सांस्कृतिक मंत्रालय में पदाधिकारी डॉ. अनुराधा दूबे ने अपने नृत्य के माध्यम से गणेश वंदना की सुरम्य प्रस्तुति से दोनों माध्यमों से उपस्थित विद्वत जनसमुदाय को हतप्रभ करते हुए मंत्र-मुग्ध कर दिया। कार्यक्रम के अगले चरण में पं सुरेश नीरव के जन्मदिन की वर्षगांठ के शुभ एवं मंगलमय अवसर पर ज्ञान चंद मर्मज्ञ द्वारा उन्हें विधिवत सम्मानित किया गया। उसी क्रम में मेजर कर्नल अनूप कुमार को माल्यार्पण, अंगवस्त्र ओढ़ाकर एवं प्रशस्ति-पत्र प्रदान करके सम्मानित किया गया। अपने अतिसंक्षिप्त उदघाटन उदबोधन में उन्होंने संस्था का यह अवसर प्रदान करने के लिए धन्यवाद ज्ञापित करते हुए अगला आयोजन कंबोडिया में आयोजित करने का आग्रह किया। तत्पश्चात्, महोत्सव के सम्मान समारोह की प्रक्रिया को गतिमान बनाए रखते हुए अखिल भारतीय सर्वभाषा संस्कृति समन्वय समिति की ओर से समारोह में उपस्थित सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों तथा हिन्दी साहित्य जगत में की विभिन्न विधाओं के हस्ताक्षरों एवं सृजनकर्ताओं डॉ. संजीव कुमार, ज्ञान चंद मर्मज्ञ, डॉ. प्रकाश उपाध्याय, विनय कुमार, गीतेश्वर घायल, कन्हैयालाल भ्रमर, डॉ. सविता चडढा, विजय प्रशांत, वंदना योगी, मधु मिश्रा, स्मृति श्रीवास्तव, सरोजनी चौधरी, कुमार सुबोध, विष्णु श्रीवास्तव, डॉ. राखी सिंह कटिहार, मेजर कर्नल अरूण कुमार नायर तथा मीरा नायर को क्रमबद्ध तरीके से माल्यार्पण, अंगवस्त्र ओढ़ाकर तथा विशिष्ट अलंकृत उपाधियों से सुसज्जित प्रशस्ति-पत्र प्रदान करके सम्मानित किया गया। इस महोत्सव के सुअवसर पर शहर के स्थानीय प्रतिनिधि के कर-कमलों द्वारा पं. सुरेश नीरव को ‘हो ची मिन्ह’ प्रशस्ति-पत्र प्रदान करके सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के उतरार्द्ध में नेत्र विशेषज्ञ एवं साहित्यकार डॉ. प्रकाश उपाध्याय के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर केंद्रित प्रज्ञान विश्वम के अंक का सभागार में विराजित गणमान्य विभूतियों के कर-कमलों द्वारा विधिवत लोकार्पण किया गया। इसी चरण को गति प्रदान करते हुए सभी सम्मानित विभूतियों ने अपने-अपने उदगारों सहित आयोजित काव्य गोष्ठी के दौरान अपनी श्रेष्ठतम रचनाओं के काव्यपाठ से उपस्थित जनसमुदाय को भाव-विभोर करते हुए लाभान्वित करने के साथ-साथ ज्ञानार्जन अर्जित कराते हुए अपनी भाव-भंगिमाओं के द्वारा मंत्रमुग्ध करके गड़गड़ाती करतल-ध्वनि के बीच वाह-वाही के उदघोषों के माध्यम से सभागार के वातावरण को गुंजायमान कर दिया। कार्यक्रम के अंतिम पड़ाव पर वरिष्ठ साहित्यकार ममता कुमार द्वारा सभागार में उपस्थित जनसमुदाय तथा आनलाइन पटल के माध्यम से जुड़े प्रबुद्धजनों एवं विद्वतजनों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए धन्यवाद और आभार ज्ञापित करने के पश्चात् समवेत स्वर में राष्ट्रीय गान के साथ भारत माता की जय एवं वन्दे मातरम् के उदघोषों सहित यह भव्य आयोजन सम्पन्न हुआ।

रिपोर्ट :— कुमार सुबोध

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