‘घराना अनाम’ — फिल्मी गीतों पर एक नई नज़र

पुणे गेस्ट हाउस स्नेह मंच द्वारा 10 अगस्त को ‘घराना अनाम’ — फिल्मी गीतों पर एक नई नज़र कार्यक्रम का आयोजन किया गया। डॉ. सुनील देवधर की संकल्पना, लेखन एवं प्रस्तुति में आयोजित इस अनूठे कार्यक्रम के माध्यम से हिंदी फिल्मी गीतों के सांस्कृतिक, साहित्यिक, ऐतिहासिक एवं दार्शनिक संदर्भों को रोचक ढंग से प्रस्तुत किया गया।
कार्यक्रम का निर्माण एवं एंकरिंग रत्ना दहिवेलकर ने की। गायक हेमंत खांगदे एवं मनाली राजे ने विभिन्न लोकप्रिय गीतों की मनमोहक प्रस्तुतियाँ दीं। अनुभवी लेखक एवं कवि डॉ. सुनील देवधर ने हिंदी सिनेमा के कुछ प्रतिष्ठित गीतों पर सार्थक टिप्पणी करते हुए उनके भीतर छिपे भाव, अर्थ और संदर्भों को दर्शकों के सामने रखा।
कार्यक्रम के दौरान दर्शकों के साथ संवाद करते हुए डॉ. देवधर ने विभिन्न गीतों की साहित्यिक एवं भावनात्मक सुंदरता को उजागर किया। पुणे में पहली बार इस प्रकार के अनूठे कार्यक्रम के माध्यम से दर्शकों को अपने प्रिय फिल्मी गीतों के पीछे छिपे अर्थों और संवेदनाओं को नए दृष्टिकोण से समझने का अवसर मिला।
कार्यक्रम में ‘मेरा नाम राजू, घराना अनाम’, ‘एक राधा एक मीरा’, ‘मैं ज़िंदगी का साथ निभाता चला गया’, ‘आज फिर जीने की तमन्ना है’ तथा ‘वंदे मातरम्’ जैसे प्रतिनिधि गीत प्रस्तुत किए गए।
पुणे के कलाप्रिय दर्शक-श्रोताओं ने इस अविस्मरणीय कार्यक्रम का आनंद लिया और फिल्मी गीतों की साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं दार्शनिक गहराई से रूबरू हुए। कार्यक्रम ने मनोरंजन के साथ-साथ हिंदी सिनेमा के गीतों को एक नए दृष्टिकोण से देखने और समझने की सार्थक पहल प्रस्तुत की।
