Category: यात्रा संस्मरण

शहर की रूह – सदियों को समेटते चंद रास्ते – (यात्रा संस्मरण)

सुबह तेज़ बारिश हो रही थी, हवा भी तेज़ थी। आभास था कि दिन सुस्त और बादलों से घिरा रहेगा। फिर पता चला कि शहर के केंद्र में उसकी कुछ…

मात्र सड़क का एक नुक्कड़ या विरोधाभासों का बवंडर – (यात्रा संस्मरण)

परिवर्तन ही सृष्टि के चालक हैं। कई सदियाँ बोल रही थीं, परिवर्तन की कहानी कह रही थीं और हमारे जैसे सैलानियों का समूह जो अपने शहर यानी मॉस्को को बेहतर…

रूस का पास्ख़ा और कैथोलिक जगत का ईस्टर – (यात्रा संस्मरण)

मौसम कैसे भी करवट क्यों न ले, वसंत गर्माहट लाने में देर करे या घोड़े पर सवार हो कर आए; विलो (Willow) प्रजाति का एक पेड़ है जो रूसी भाषा…

रूसी लेखकों और अन्य कलाकर्मियों का अड्डा- जागीर अब्राम्त्सेवा – (यात्रा संस्मरण)

ताल को जाती ढलान पर दूब की मख़मली क़ालीन बिछ गई है। सारा वातावरण वसंत की तस्वीर बना हुआ था, मैं उसका रसपान करते-करते अपने ख़यालों में लीन चली जा…

Translate This Website »