औरत,माटी और प्रेम की कविताएं – आशमा कौल : समीक्षक – निशा चंद्रा
औरत,माटी और प्रेम की कविताएं – आशमा कौल : समीक्षक – निशा चंद्रा औरत, माटी और प्रेम…..यह तीनों शब्द अपने भीतर जीवन की सबसे गहरी संवेदनाओं को समेटे हुए हैं।…
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औरत,माटी और प्रेम की कविताएं – आशमा कौल : समीक्षक – निशा चंद्रा औरत, माटी और प्रेम…..यह तीनों शब्द अपने भीतर जीवन की सबसे गहरी संवेदनाओं को समेटे हुए हैं।…
“हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष: विदेश में हिंदी पत्रकारिता के अतीत, वर्तमान और भविष्य पर होगा वैश्विक विमर्श“
“साहित्य अकादेमी की राष्ट्रीय संगोष्ठी में तेलुगु साहित्य के विविध आयामों पर होगा विमर्श”
करनाल साहित्य उत्सव में सजेगा साहित्य, सम्मान और सृजन का संगम