चैट स्टोरी ( मैथिली )

‘हैलो, फल्लां ग्रुप के एडमिन छी यौ’
‘जी, कहल जाय।’
‘हम बड़का कवि छी, जानल मानल।’
‘अच्छा, नमस्कार श्रीमान। की नाम भेल, अपने के?’
‘हमरा नय चिन्हय छ? ऐ हौ हमरा के नय चिन्हय यै। हम छी मुकुंद बाबू।’
‘नमस्कार नमस्कार, की कैल जाय अपने लेल, से कहियौ?’
‘ग्रुप पर लाइव बजाब हमरा। हमरा एक टा कार्यक्रम करबाक अय।’
‘अच्छा सर बनबय छी प्रोग्राम।’
‘हं, ओना त हमरा सब चीन्हते अय, किछ लोक और चिन्ह जैत त नीक रहत।’
‘जी’
‘आ सब के कहि दिहक जे बड़का कवि आबि रहल छैथ, जे बेसी लोक के जुटानी हुऐ। ओना त हमरा सब चीन्हते अय, किछ लोक के और कहि देबहक त नीक रहत।’

चैट स्टोरी ( हिन्दी )

हेलो फ़लाँ ग्रुप के एडमिन बोल रहें हैं ?
जी कहिए!
हम सुप्रसिद्ध कवि है। मतलब जाने माने कवि !
अच्छा, नमस्कार श्रीमान। क्या नाम बताया अपने ?

हमें नहीं पहचाना आपने ? ए लो, हमें कौन नहीं जानता ? हम – मुकुंद बाबू।’

नमस्कार नमस्कार, जी कहिए! मैं आपके किस काम आ सकता हूँ?

ग्रुप पर एक लाइव करवाईये ना हमारा। हमारा भी एक कार्यक्रम हो जाए !

अच्छा सर बनाते हैं प्रोग्राम।’
‘जी वैसे तो बहुत लोग जानते हैं हमें ! पर कुछ और लोग भी जान जायेंगें।

जी’
‘आप सब से कह दीजिए कि फ़लाँ बड़े कवि आ रहें हैं। बस कुछ और लोग जुटा लीजिए
वैसे तो हमें सब जानते हैं पर कुछ और लोगों को भी बोल देंगे तो ठीक रहेगा !

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