Category: स्वरांगी साने

ब्राउन का फीका रंग ( समीक्षा ) : स्वरांगी साने

ब्राउन का फीका रंग ( समीक्षा ) : स्वरांगी साने काले और सफ़ेद के बीच का कोई रंग ब्राउन हो सकता है। इन दिनों एशियन परिवारों को भी ब्राउन फैमिली…

अभी कई सारे गीत उन पर लिखे जाने की प्रतीक्षा में हैं – स्वरांगी साने : समीक्षा

अभी कई सारे गीत उन पर लिखे जाने की प्रतीक्षा में हैं – स्वरांगी साने : समीक्षा डॉ. सुनील देवधर आकाशवाणी से सहायक निदेशक के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं।…

“रफ़ी के सुरों में गूंजती गाडगिल की आवाज़”- स्वरांगी साने

“रफ़ी के सुरों में गूंजती गाडगिल की आवाज़”- स्वरांगी साने ‘दुःख-सुख की हर एक माला, कुदरत ही पिरोती है’ सन् 1981 की फ़िल्म ‘कुदरत’ का यह गीत है, जिसे आर.डी.…

ऊधो मन न भए दस-बीस…(स्वरांगी साने)

ऊधो मन न भए दस-बीस…(स्वरांगी साने) इंदौर से उज्जैन कितनी दूरी पर है? -56 -अरे 56 तो दुकानें हैं, उज्जैन 53 किमी की दूरी पर है।यह एक आम संवाद हुआ…

आश्वासन को विश्वास में बदलती फ़िल्म (समीक्षा)

आश्वासन को विश्वास में बदलती फ़िल्म (समीक्षा) फ़िल्मों के बारे में कहा जाता है कि वे वहाँ से शुरू होती हैं, जहाँ आपकी कल्पनाशक्ति ख़त्म हो जाती है। पर इन…

उछालवाद के दौर में पीछे छूटते मूल मुद्दे (समीक्षा)

उछालवाद के दौर में पीछे छूटते मूल मुद्दे (समीक्षा) पूरे 39 चालीस पहले बनी फ़िल्म ‘इजाज़त’ फिर एक बार देखी। फ़िल्म के बनने से लेकर अब तक में लगभग 40…

हिंदी के दर्शक कहाँ हैं? (समीक्षा)

हिंदी के दर्शक कहाँ हैं? (समीक्षा) पद्मश्री शेखर सेन का नाम आते ही वह व्यक्तित्व आँखों के सामने आ जाता है जिसने सुर-तुलसी-कबीर-विवेकानंद की एकल प्रस्तुतियाँ दी हैं। एक मुलाकात…

हम ‘ई’ से ईमान रखने नहीं, बेचने लगे – (वर्णमाला 4 – ब्लॉग)

हम ‘ई’ से ईमान रखने नहीं, बेचने लगे स्वरांगी साने बचपन में याद करते थे ई, ईख की। बाद के वर्षों में उसे ईख कहना कब बंद हुआ, याद नहीं।…

हम ‘ई’ से ईमान रखने नहीं, बेचने लगे – (वर्णमाला 4 – ब्लॉग)

हम ‘ई’ से ईमान रखने नहीं, बेचने लगे स्वरांगी साने बचपन में याद करते थे ई, ईख की। बाद के वर्षों में उसे ईख कहना कब बंद हुआ, याद नहीं।…

‘इ’, देखन में छोटी लगे… – (वर्णमाला 3 – ब्लॉग)

‘इ’, देखन में छोटी लगे… स्वरांगी साने ‘इंगित पर तुम्हारे ही भीम ने अधर्म किया…’ धर्मवीर भारती लिखित ‘अंधा युग’ में गांधारी का यह विलाप ‘इ’ की इतनी ताकत को…

आह से ही तो उपजा था पहला गान – (वर्णमाला 2 – ब्लॉग)

आह से ही तो उपजा था पहला गान स्वरांगी साने आषाढ़ के किसी दिन बादल बरसे पर हुआ कुछ ऐसा कि वाह न निकली और मुँह से आह निकल गई!…

 ‘अ’ से शुरू हुई एक अधूरी यात्रा… – (वर्णमाला -1) – (ब्लॉग)

‘अ’ से शुरू हुई एक अधूरी यात्रा स्वरांगी साने अभी उसने अपनी बात पूरी भी नहीं की थी, बात क्या, जो वह कह रही थी, उतना शब्द भी पूरा नहीं…

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