दिन विशेष नवोदित रचनाकार में राजवीर गौरव संघवी की रचना

‘Hands Beyond Borders’: बच्चों के हाथों से विश्व शांति की आवाज़
पुणे: *युद्ध, बाल तस्करी, हिंसा और विस्थापन का सबसे गहरा असर बच्चों पर पड़ता है। उनका बचपन, शिक्षा, परिवार और सुरक्षित भविष्य उनसे छिन जाता है। इसी पीड़ा को आवाज देने और बच्चों को वैश्विक शांति की मुहिम से जोड़ने के उद्देश्य से पुणे के 13 वर्षीय कक्षा 8 के छात्र **राजवीर गौरव संघवी ने ‘Hands Beyond Borders’ नामक वैश्विक युवा-नेतृत्व वाली शांति पहल शुरू की है।

इस पहल का मूल संदेश है— “We are divided by borders, but we are all united at hearts” — “हम सीमाओं से विभाजित हैं, लेकिन हमारे दिल एक हैं।”* यह अभियान मानता है कि दुनिया के अलग-अलग देशों में रहने वाले बच्चों की राष्ट्रीयताएं भले अलग हों, लेकिन शांति, सुरक्षा और बेहतर भविष्य की उनकी आकांक्षा एक समान है।
Hands Beyond Borders के तहत स्कूलों में विद्यार्थी रंगीन हथेलियों की छाप और अपने शांति संदेश देते हैं। प्रत्येक हाथ की छाप उन बच्चों के प्रति एकजुटता का प्रतीक है, जिन्होंने युद्ध, हिंसा, बाल तस्करी और विस्थापन के कारण अपना जीवन, परिवार, शिक्षा या बचपन खो दिया।
18 वर्ष से कम उम्र के बच्चे मतदान नहीं कर सकते और अक्सर उनकी आवाज़ निर्णय लेने वाले मंचों तक नहीं पहुंचती। ऐसे में उनकी रंगीन हथेली शांति के पक्ष में उनके प्रतीकात्मक “वोट” का रूप लेती है। यह केवल एक कला-अभियान नहीं, बल्कि बच्चों की आवाज़ को दुनिया तक पहुंचाने का प्रयास है।
राजवीर का संदेश स्पष्ट है—शांति केवल बोर्डरूम में बैठकर चर्चा करने, सरकारों या राजनेताओं की जिम्मेदारी नहीं है। आज के युवा कल की दुनिया के नागरिक और नेतृत्वकर्ता हैं। यदि हमें सुरक्षित और शांतिपूर्ण भविष्य चाहिए, तो उसकी नींव आज की युवा पीढ़ी को रखनी होगी।
अब तक Hands Beyond Borders ने 21 स्कूलों और शैक्षणिक मंचों पर 15,000 से अधिक हाथों की छाप को 350 मीटर लंबे ‘Peace Cloth’ पर दर्ज किया है। इस अभियान से स्विट्जरलैंड, युगांडा, हांगकांग, श्रीलंका और नेपाल सहित विभिन्न देशों के युवाओं ने भी जुड़कर अपने शांति संदेश दिए हैं।
21 सितंबर, विश्व शांति दिवस के अवसर पर Hands Beyond Borders विश्वभर के युवाओं से आह्वान करता है कि वे शांति को केवल एक दिवस या विचार न बनाएं, बल्कि उसे अपने कार्यों और समुदायों का हिस्सा बनाएं।
