रोहन : आधी छुट्टी की घंटी बज गई है।
समीर : चलो-चलो, जल्दी चलो, खेल के मैदान में चलकर खेलते हैं।
रोहन : करण को देखो वह पहले ही झूले की ओर लपका रहा है।
समीर : उसे जाने दो हम बास्केट बॉल खेलेंगे। मेरी माँ कहती हैं बास्केटबॉल खेलने से लंबे होते हैं।
रोहन : सार्थक और लक्ष्य तो क्रिकेट खेलने गए हैं।
समीर : शुभम भी आज अपना बल्ला लाया है। वह भी क्रिकेट ही खेलेगा।
रोहन : आज कोच सर नहीं आए और क्रिकेट की पिच भी खराब है। खेलने का आनंद नहीं आएगा।
समीर : देवीना और आनंद रस्सी कूद रहे हैं। यह भी एक अच्छा व्यायाम है।
रोहन : अपनी कक्षा के कुछ विद्यार्थियों को मैं बैडमिंटन कोर्ट की ओर जाते हुए भी देखा है।
समीर : भाई इतनी बातें मत करो नहीं तो हमारा खेल ही छूट जाएगा
रोहन : क्या हमारे पास बास्केटबॉल खेलने के लिए दो टीम बनाने जितने लोग हैं? बास्केटबॉल खेलने के लिए कम से कम एक टीम में पाँच लोग होने चाहिए।
समीर : अरे नहीं अभी तो हम केवल प्रैक्टिस कर रहे हैं, जिसे अभ्यास कहते हैं। इसके लिए हम दो भी काफी हैं। एक बार तुम कोशिश करो और एक बार मैं कोशिश करूंगा।
रोहन : ठीक, उस लाइन से दौड़ कर आना है और फिर बाल को बास्केट में डालना है। यदि तुमने बास्केट में बॉल डाल ली तो तुम्हें उसके दो पॉइंट मिलेंगे।
समीर : तुम्हें पता है इन दिनों हमारे कुछ साथी मैदान में खो-खो भी खेल रहे हैं। खो-खो भारत का एक जाना-माना खेल है।
रोहन : खो-खो ही क्यों कबड्डी भी तो भारत का विशेष खेल है।
समीर : सुनो, तुम बार-बार अपनी बोतल से क्या पी रहे हो? क्या इसमें पानी है?
रोहन : खेल के मैदान में बहुत पसीना आता है। इसलिए मेरी माँ ने पानी में ग्लूकोज डाल दिया है और थोड़ा नमक भी। मैं उसे ही बार-बार पी रहा हूँ।
समीर : अरे-अरे उधर देखो क्या हुआ? लगता है किसी ने एक बच्चे को धक्का दे दिया है।
रोहन : मैडम बार-बार कहती हैं कि खेलते हुए हमें थोड़ा सावधान रहना चाहिए। गलती से भी किसी को धक्का न लगे, नहीं तो चोट लग सकती है।
समीर : तुम सही कह रहे हो। पिछले महीने बंटी इस खेल के मैदान में गिर गया था।
रोहन : हाँ, उसके पैर में अभी भी प्लास्टर बँधा हुआ है।
समीर : आजकल वह केवल शतरंज खेलने जाता है, जिसे वह बैठकर भी खेल सकता है।
