भारतीय भाषाओं का सचिवालय स्थापित किया जाएगा
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र,अंतर्राष्ट्रीय सहयोग परिषद, वैश्विक हिंदी परिवार और भारतीय भाषा विभाग ( दिल्ली विश्वविद्यालय) द्वारा 9-11 फ़रवरी को आयोजित तृतीय अंतरराष्ट्रीय भारतीय भाषा सम्मेलन में भारतीय भाषाओं के समग्र विकास और समकालीन चुनौतियाँ को देखते हुए यह निर्णय लिया गया कि भारतीय भाषाओं के सचिवालय की स्थापना की जाएगी। यह सचिवालय भाषाओं के राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचार करने, भारतीय भाषाओं का थिंक टैंक विकसित करने, प्रकाशन करने, वेबसाइट चलाने, न्यायलयों, संसद, तकनीकी क्षेत्रों में बदलाव के लिए, भाषाओं की नि:शुल्क कक्षाएँ चलाने जैसे कार्यों को प्राथमिकता से करेगा। सम्मेलन के यह निष्कर्ष समापन समारोह में सम्मेलन के निदेशक अनिल जोशी ने पढ़ें। इन्हें तैयार करने में भारतीय भाषा मंच के मार्गदर्शक श्री अतुल कोठारी और श्री ए विनोद की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
इस भव्य और महत्वपूर्ण सम्मेलन का उद्घाटन माननीय उपराष्ट्रपति जी द्वारा किया गया था।

उद्घाटन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने कहा कि भाषाएं केवल संवाद का माध्यम नहीं होतीं, बल्कि वे स्मृति, संस्कृति, परंपरा और पीढ़ियों से हस्तांतरित मूल्यों की वाहक होती हैं। भारत की एकता कभी एकरूपता पर आधारित नहीं रही, बल्कि विभिन्न भाषाओं के बीच आपसी सम्मान और सह-अस्तित्व से बनी है। भारतीय भाषाएं एक-दूसरे की विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं।
उपराष्ट्रपति महोदय ने आगे कहा- प्राचीन शिलालेखों, ताड़पत्रों और हस्तलिखित ग्रंथों से लेकर आज के डिजिटल माध्यमों तक भाषाओं ने मानव विचारों को आकार दिया है और ज्ञान को संरक्षित किया है। आज आवश्यकता है कि भाषाई विविधता की रक्षा के साथ-साथ लुप्तप्राय भाषाओं को शिक्षा और तकनीक से जोड़कर नई पीढ़ी तक पहुंचाया जाए। हर भाषा का सम्मान करना, हर भारतीय की गरिमा का सम्मान करने जैसा है।
उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के अध्यक्ष और प्रख्यात चिंतक, विद्वान पद्म भूषण रामबहादुर राय ने की। इस अवसर पर पूर्व केन्द्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ अति विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे। कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय सहयोग परिषद् के महासचिव श्याम परांडे, स्वागताध्यक्ष और जापान के वरिष्ठ भाषाविद् पद्मश्री तोमियो मिज़ोकामि विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे। इस अवसर पर इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी और दिल्ली विश्वविद्यालय के भारतीय भाषा विभाग के अध्यक्ष प्रो. रवि प्रकाश टेकचंदानी भी उपस्थित रहे।
उद्घाटन कार्यक्रम का संचालन अंतरराष्ट्रीय भारतीय भाषा सम्मेलन के निदेशक श्री अनिल जोशी ने किया। विशिष्ट अतिथि पद्मश्री तोमियो मिज़ोकामि ने हिन्दी में बोलते हुए कहा – लोग कहते हैं कि मैं भारतीय हूं, जो गलती से जापान में पैदा हो गया। इस सम्मेलन में देश के विभिन्न प्रांतों के अतिरिक्त 25 से ज़्यादा देशों के प्रतिनिधियों और देश के 20 प्रांतों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस अवसर पर डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने लेखकों -चित्रकारों की चित्र प्रदर्शनी का भी उद्घाटन किया।
11 जनवरी, 2026 को समापन समारोह में मुख्य अतिथि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला जी ने सम्मेलन के आयोजन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मेलन भारत और विदेश में भाषाओं से संबंधित विचारों को साझा करने का महत्वपूर्ण मंच बना है। उन्होंने बताया कि भारतीय संसद में भी सभी भारतीय भाषाओं में वाचिक संप्रेषण की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। ऐसा करने से सांसदों के बीच अंग्रेज़ी के स्थान पर भारतीय भाषाओं के प्रयोग की स्थिति सहज हो गई है। उन्होंने कहा कि भारतीय भाषाओं के उत्थान के लिए आने वाले किसी भी प्रस्ताव को उनका समर्थन और सहयोग मिलेगा।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष श्री विजेंद्र गोयल थे। उन्होंने बताया कि विधानसभा के कार्यव्यवहार में बहुलता से हिंदी का प्रयोग किया जा रहा है।
सत्र की अध्यक्षता इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र के अध्यक्ष एवं पद्म भूषण से सम्मानित प्रख्यात चिंतक राम बहादुर राय ने की। विशिष्ट वक्ता शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय संयोजक ए. विनोद रहे। इस अवसर पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग परिषद् के महासचिव श्याम परांडे का सान्निध्य भी प्राप्त हुआ। सम्मेलन के निदेशक अनिल जोशी ने सम्मेलन के निष्कर्ष पढ़ें। साथ ही इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के डीन (प्रशासन) रमेश चंद्र गौड़ और दिल्ली विश्वविद्यालय के भारतीय भाषा विभाग के अध्यक्ष रवि प्रकाश टेकचंदानी की भी इस अवसर पर उपस्थिति रही। कार्यक्रम के प्रारम्भ में विनय शील चतुर्वेदी ने स्वागत भाषण करते हुए अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया। मंच संचालन डॉ. अनीता वर्मा ने किया। तीन दिनों के इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में 40 से अधिक सत्र आयोजित किए गए ।
सम्मेलन के पहले दिन – भारतीय भाषाएँ और प्रौद्योगिकी, जल प्रकृति और जीवन, मेरे शब्द – मेरी दृष्टि.भारत की सहभाषाएँ, गिरमिटिया देशों में भारतीय भाषाएँ , देश के विभिन्न भागों में बोली जाने वाली भाषाएँ, विदेश के हिंदी विद्यार्थियों के लिए पाठ्यक्रम, प्रमुख रचनाओं का नाट्य पाठ, गद्य रचनाओं का पाठ, लेखन और चित्रकला तथा मेरे शब्द – मेरी दृष्टि जैसे विषयों पर सत्र आयोजित किए गए।
सम्मेलन के दूसरे दिन का आरम्भ विश्व हिंदी सम्मेलन : इतिहास, वर्तमान और भविष्य – हिंदी दिवस पर विशेष, अनुवाद नया परिप्रेक्ष्य – विशेष संदर्भ – अनुवाद और प्रौद्यौगिकी, तमिल भाषा में साहित्य की स्वर्णिम परम्परा, शोध पत्र वाचन, भारतीय डायस्पोरा : भूमिका और दिशा, भारत की ज्ञान परंपरा : भारतीय विरासत – भविष्य से जुड़ा अतीत, दक्षिण भारतीय भाषाएँ : तेलुगु, कन्नड़, मलयालम – परम्परा और विकास की दिशाएँ, पश्चिम भारत की भाषाएँ – गुजराती, मराठी, कोंकणी, सिंधी डायस्पोरा के संदर्भ में, भारतीय भाषाएँ : विकास का ब्लू प्रिंट, पुस्तक लोकार्पण, पंजाबी, कश्मीरी, उर्दू, डोगरी – स्थिति – विकास की दिशाएँ, प्रख्यात लेखक : हमारा समय – मेरी दृष्टि – (स्व. डॉ. रामदरश मिश्र को समर्पित सत्र), कवि सम्मेलनों तथा युवा रचना पाठ के सत्र रखे गए।
सम्मेलन के तीसरे दिन का आरम्भ शोध पत्र वाचन से हुआ जिसमें प्रवासी साहित्य, भारतीय भाषाएँ, भारतीय ज्ञान परम्परा, अनुवाद : संभावना एवं चुनौतियाँ, नया मीडिया जैसे विषयों पर शोध-पत्र पढ़े गए। इसके बाद विदेश में हिंदी शिक्षण: प्रविधि और दिशाएँ, पूर्व की शास्त्रीय भाषाएँ – बांग्ला, ओडिया : प्रगति की नई उड़ान, भारतीय भाषाओं का मीडिया – भाषा और विषय वस्तु – नया परिप्रेक्ष्य, उच्च शिक्षा में भारतीय भाषाएँ जैसे विषयों पर सत्र संचालित किए गए।
इस सम्मेलन में महामहिम उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन, लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला, अध्यक्ष दिल्ली विधान सभा श्री विजेंद्र गुप्ता, भारत के पूर्व शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक, राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण के पूर्व अध्यक्ष श्री आदर्श गोयल , फीजी के कैबिनेट मंत्री श्री चरणजीत , इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केंद्र के अध्यक्ष श्री राम बहादुर राय, सदस्य सचिव श्री सच्चिदानंद जोशी , मध्य प्रदेश के मुख्य चुनाव आयुक्त श्री मनोज श्रीवास्तव, उत्तर प्रदेश के पुर्व शिक्षा मंत्री श्री रविंद्र शुक्ल व श्री अशोक बाजपेयी, श्री अनिल सहस्त्रबुद्धे,,केंद्रीय हिंदी संस्थान के निदेशक श्री सुनील कुलकर्णी, केंद्रीय हिंदी निदेशालय के निदेशक श्री हितेद्र मिश्र , रवींद्र भारती विश्वविद्यालय के कुलपति श्री संतोष चौबे, गुजरात साहित्य अकादमी के श्री जयेंद्र सिंह जाधव , तमिल क्लासिकल अकादमी की रजिस्ट्रार श्रीमती भुवनेश्वरी , अंतरराष्ट्रीय सहयोग परिषद के महा सचिव श्री श्याम परांडे, वैजापान से आए प्रख्यात शिक्षाविद पो. तोमियो मिज़ोकामी, प्रसिद्ध साहित्यकार ममता कालिया, गगन गिल और मनीषा कुलश्रेष्ठ , वरिष्ठ कवि बाल स्वरूप राही जैसे विशिष्ट लोगों की भागीदारी रही ।
इस सम्मेलन में ब्रिटेन, कनाडा, न्यूज़ीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, श्रीलंका, नेपाल, अमेरीका , कोरिया , नीदरलैंड, फ्रांस, मॉरीशस, थाईलैंड, जापान सहित विभिन्न देशों के कुल मिला कर 100 से अधिक अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
