पुस्तक समीक्षा: “ड्रीमटाइम कहानियाँ” (अनुवाद: रेखा राजवंशी)

“ड्रीमटाइम कहानियाँ” ऑस्ट्रेलिया की आदिवासी (एबोरीजिनल) लोककथाओं का एक अत्यंत रोचक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध संग्रह है, जिसे रेखा राजवंशी ने हिंदी में अनूदित किया है। यह पुस्तक केवल कहानियों का संकलन नहीं, बल्कि एक पूरी सभ्यता, उसके विश्वासों, प्रकृति-प्रेम और जीवन-दर्शन की झलक प्रस्तुत करती है। यह पुस्तक डायमंड बुक्स से प्रकाशित हुई है और इसमें 21 लोककथाएं हैं। रंगीन तथा श्वेत श्याम दोनों तरह की पुस्तकें उपलब्ध हैं। ये लोककथाएं मात्र मनोरंजन ही नहीं करेंगी बल्कि बच्चों को ऑस्ट्रेलिया के अनूठे पशु पक्षियों से भी परिचित करवाएंगी।

सबसे पहले, पुस्तक की भूमिका ही पाठक को एक अलग दुनिया में ले जाती है। लेखिका ने अपने अनुभवों के आधार पर यह बताया है कि इन कहानियों का अनुवाद करना कितना चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि एबोरीनल भाषाओं और उनकी सांस्कृतिक बारीकियों को समझना आसान नहीं है। फिर भी, उन्होंने बेहद सरल और सहज हिंदी में इन कहानियों को प्रस्तुत किया है, जिससे भारतीय पाठक आसानी से जुड़ पाते हैं।
पुस्तक की खासियत यह है कि इसमें शामिल सभी कहानियाँ ‘ड्रीमटाइम’ (स्वप्नकाल) से जुड़ी हैं – यानि वह काल जब सृष्टि की रचना हुई मानी जाती है। इन कहानियों में प्रकृति, पशु-पक्षी और मानव के बीच गहरा संबंध दिखाया गया है। जैसे –
“मिनावी बन गई मगरमच्छ” हमें बुरे स्वभाव और उसके परिणाम का संदेश देती है।
“टिडलिक मेंढक” एक रोचक कथा है जो सामूहिक बुद्धि और सहयोग की ताकत दिखाती है।
“इंद्रधनुषी सर्प” सृष्टि-निर्माण की कल्पना को बेहद सुंदर ढंग से प्रस्तुत करती है।
इन कहानियों में नैतिक शिक्षा भी बहुत सहज तरीके से दी गई है – बड़ों का सम्मान, प्रकृति का आदर, ईमानदारी, और सामुदायिक जीवन के मूल्य। यह विशेषता इन्हें भारतीय पंचतंत्र या लोककथाओं के समान बना देती है, जिससे पाठक को अपनापन महसूस होता है।
भाषा की बात करें तो अनुवाद सरल, प्रवाहमय और बोलचाल के करीब है। कहने का अंदाज़ इतना जीवंत है कि पाठक आसानी से दृश्य की कल्पना कर सकता है।
पुस्तक का एक और महत्वपूर्ण पहलू है कि यह दो देशों के मध्य सांस्कृतिक सेतु स्थापित करती है। यह भारतीय पाठकों को ऑस्ट्रेलिया के आदिवासी जीवन, उनकी मान्यताओं और परंपराओं से परिचित कराती है। साथ ही यह यह भी दिखाती है कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले लोगों के मूल मूल्य कितने समान होते हैं—प्रकृति के प्रति सम्मान, पूर्वजों का आदर और सामूहिक जीवन।
“ड्रीमटाइम कहानियाँ” एक ऐसी पुस्तक है जो बच्चों और बड़ों – दोनों के लिए समान रूप से उपयोगी और आनंददायक है। यह न केवल मनोरंजन करती है, बल्कि एक नई संस्कृति को समझने का अवसर भी देती है।
अगर आप लोककथाओं, संस्कृति और सरल मगर गहरी कहानियों में रुचि रखते हैं, तो यह पुस्तक ज़रूर पढ़ने और गुनने लायक है।

समीक्षक :— अनीता वर्मा

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