यूके हिंदी समिति की एक नयी पहल: शब्द संवाद

साहित्य कक्षाओं की इस श्रृंखला की शुरुआत आज मेरी दो कहानियों पर आधारित थी, जो मेरे लिए बड़े सौभाग्य की बात है। यह केवल एक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों के लिए उन लेखकों से प्रत्यक्ष मिलने का अवसर है जिनकी रचनाएँ वे अपने पाठ्यक्रम में पढ़ रहे हैं। विचारों, प्रश्नों, जिज्ञासाओं और आत्मीय संवाद से भरपूर यह आयोजन शिखा वार्ष्णेय के सुंदर निवास स्थान पर आयोजित किया गया था तो आतिथ्य सत्कार भरपूर था, पकवानों की छठा देखते ही बनती थी। सौम्या और पंकज के बिना यह सत्कार अधूरा रहता, उनकी भी मनोकामना पूर्ण हों!

इस नवाचार के लिए यूके हिंदी समिति की पूरी टीम, विशेषतः सुरेखा चोफ़ला जी को बहुत-बहुत बधाई! आशा है कि मेरे पाठकों को भी उतना ही आनन्द आया होगा जितना कि मुझे आया, बहुत बहुत आभार और इस शृंखला की अग्रिम कड़ियों के लिए मेरी समस्त शुभ कामनाएँ।

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