अपनी जगह, अपना शहर – (निबंध)
आजकल दुनिया निरंतर सिमटती जा रही है और लोग बेहतर काम और जीवन की तलाश में न सिर्फ़, अपना गाँव और शहर बदलते रहते हैं हैं बल्कि देश और महाद्वीप…
हिंदी का वैश्विक मंच
आजकल दुनिया निरंतर सिमटती जा रही है और लोग बेहतर काम और जीवन की तलाश में न सिर्फ़, अपना गाँव और शहर बदलते रहते हैं हैं बल्कि देश और महाद्वीप…
इस रास्ते पर सप्ताह में चार दिन जाते हुए लगभग आठ साल। रास्ता मानो रट-सा गया है। घर से निकलने पर आधे मील के बाद बाँयी तरफ मुड़ने पर एक…
संगीत की अनौपचारिक महफ़िल में बैठी हूँ। महफ़िल अनौपचारिक अवश्य है लेकिन महफ़िल संगीत के बड़े जानकारों की है। बड़े उस्ताद हैं तो छोटे उस्ताद भी, और निष्ठावान शागिर्द भी,…
‘सर’ के यहाँ घुसते ही लगा कि शायद घर पर कुछ भूल आई हूँ। लेकिन समझ में नहीं आया। अरे, आप सोच रहे होंगे, ये ‘सर’ कौन हैं? तो बताऊँ…
अमरीका में या कैनेडा में रहना अलग बात है और भारत में रहना अलग। इससे भला कौन न सहमत होगा। जो न होगा वो मूर्ख कहलायेगा और मूर्ख कहलाना किसी…
कालिदास की वैज्ञानिक दृष्टि और उनका राष्ट्रीय क्षितिज – कमलाकांत त्रिपाठी याद हो कि न याद हो: कालिदास की वैज्ञानिक दृष्टि और उनका राष्ट्रीय क्षितिज पुराणमित्येव न साधु सर्वं न…
हिंदी के संत साहित्य में कबीर का अत्यंत महत्त्वपूर्ण स्थान है। चार प्रमुख भक्त कवियों में कबीर सबसे पहले आते हैं। भक्ति काल का समय मुहम्मद बिन तुगलक से शुरू…
सिनेमा के पर्दे पर सफल सितारें , सियासत में भी जोर आजमाईश करते रहें हैं | अभिनय कला में पारंगत होने से, ये रूप बदलने में माहिर होते हैं |…
सिनेमा और मीडिया समाज के दर्पण हैं | इस दर्पण में सामाजिक चित्र-बिम्ब अपनी मुखर ध्वनि के साथ प्रतिबिम्बित होते हैं | इन्हें यदि समाज का दिव्य चक्षु कहा जाए…
भारत –चीन विश्व की महान सभ्यताओं में से हैं जहाँ ज्ञान –विज्ञान की लौ सहस्त्राब्दियों से जल रही है I भारत – चीन ने अपनी ज्ञान परंपरा से सम्पूर्ण मानव…
भारत एवं चीन विश्व की चार सबसे पुरानी सभ्यता वाले देश हैं जिनके मध्य दो सहस्त्र वर्षों के सांस्कृतिक आदानप्रदान का इतिहास रहा है I दोनों देश सदियों से एक…
“जल” मानव अस्तित्व के अपरिहार्य कारकों में से एक है, इसीलिए मानव सदियों से नदियों के किनारे हीं वास करता आया है। मानव सभ्यता की उत्पति भी नदियों के किनारों…
भारत एवं चीन विश्व के चार महान सभ्यताओं में शामिल है, दोनों देशों के मध्य २००० वर्षों के मैत्री सम्बन्ध का इतिहास रहा है I दोनों देशों के मध्य उच्च…
सब बिज़ी हैं! जी, सभी व्यस्त हैं ऐसा भी लिखा जा सकता था किन्तु वह यथार्थ का परिमार्जित संशोधित रुप होता अर्थात् व्याकरणीय छन्नी से छानकर आदर्श की मिलावट के…
दैहिक, वैचारिक, आर्थिक अथवा सामाजिक समता एवं स्वतंत्रता? आख़िर वह कौन सी धुरी है जिसके इर्द-गिर्द, गले में नारीवाद की घंटी लटकाकर कोल्हू के बैल सदृश जुते हुए विचारक, वर्षों…
मूल लेखक – प्रो. यु लोंग यू , निर्देशक , भारत अध्ययन केंद्र , शनचन विश्ववविद्यालय , चीन अनुवादक – डॉ. विवेक मणि त्रिपाठी , एसोसिएट प्रोफ़ेसर (हिंदी ), क्वान्ग्तोंग…
10 जनवरी 1974 में नागपुर में आयोजित पहले विश्व हिंदी सम्मेलन की वर्षगाँठ को चिह्नित करने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के द्वारा 10 जनवरी 2006 से एक…
दिव्या माथुर समय तेजी से बदल रहा है, जाहिर है कि हमारे साहित्य में भी यह बदलाव, व्याकुलता और बेचैनी छलक रही है जो हिन्दी साहित्य को अपनी मौलिकता से…
मॉरीशस में हिंदी के स्वरूप को यदि हम जानना चाहते हैं तो इतिहास में झाँके बगैर हम इस दिशा में आगे नहीं बढ़ सकते । जब हम ऐतिहासिक तथ्यों को…