दोहे : विनयशील चतुर्वेदी
दोहे : विनयशील चतुर्वेदी सहज सरल सुंदर सुखद, कविता ज्ञान निकुंज ।बरबस मन मधुकर विमल, मोहित अक्षर पुंज ।। हृदय विवेक वीहीन कवि, बिहरेंं काव्याकाश ।रजत रेख घन दामिनी, ज्यों…
हिंदी का वैश्विक मंच
दोहे : विनयशील चतुर्वेदी सहज सरल सुंदर सुखद, कविता ज्ञान निकुंज ।बरबस मन मधुकर विमल, मोहित अक्षर पुंज ।। हृदय विवेक वीहीन कवि, बिहरेंं काव्याकाश ।रजत रेख घन दामिनी, ज्यों…