उसका जाना
बेला हैरान थी, माँ को यूँ जार-जार रोते उसने कभी नहीं देखा था। कभी-कभी घर के कोनों में छुप कर माँ सुबक तो लेती थी पर इस तरह किसी अजनबी…
हिंदी का वैश्विक मंच
बेला हैरान थी, माँ को यूँ जार-जार रोते उसने कभी नहीं देखा था। कभी-कभी घर के कोनों में छुप कर माँ सुबक तो लेती थी पर इस तरह किसी अजनबी…
डॉ. शैलजा सक्सेना शिक्षा: एम.ए, (हिंदी), एम.फिल, पी.एच.डी.(हिंदी, दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली) मानव संसाधन डिप्लोमा (ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट- मैकमास्टर यूनिवर्सिटी, हैमिल्टन, कनाडा) कार्य-अनुभव: जानकी देवी कॉलेज-सन १९८९ से १९९८ तक हिन्दी…