Category: शैलजा सक्सेना

कनाडा के वरिष्ठ साहित्यकार श्याम त्रिपाठी को श्रद्धांजलि : डॉ. शैलजा सक्सेना

कनाडा के वरिष्ठ साहित्यकार श्याम त्रिपाठी को श्रद्धांजलि : डॉ. शैलजा सक्सेना मृत्यु का सन्नाटा उन लोगों के लिए अधिक होता है जो पीछे रह जाते हैं। लोग कहते हैं…

बूढ़ी यादें ( कविता ) : डॉ. शैलजा सक्सेना

बूढ़ी यादें ( कविता ) : डॉ. शैलजा सक्सेना याद आ रही तेरी बेटादिन में ही अँधियारा छायाआँखें अब कमज़ोर हो गईं,सही लग रहा मैला-मैला॥ तू अपने घर उलझा है,पर…

पिछली रोटी ( कविता ) : डॉ. शैलजा सक्सेना

पिछली रोटी ( कविता ) : डॉ. शैलजा सक्सेना उसने कभी नहीं दीपिछली रोटीअपने पति और बच्चों को,….ख़ुद ली…!! जब भूलने लगी अपना होना,तो याद आयामाँ ने भी नहीं दी…

दो लड़कियाँ ( कविता ) : डॉ. शैलजा सक्सेना

दो लड़कियाँ ( कविता ) : डॉ. शैलजा सक्सेना दो –दो लड़कियाँ रहती हैं मेरे भीतर!एक वो, जो पैदा हुई थीगली के कोने वाले घर में जहाँ सौर के बाहर…

 गोर्की की माँ – समीक्षक : डॉ. बंदिता सिन्हा

गोर्की की माँ – समीक्षक : डॉ. बंदिता सिन्हा आज दुनिया की इतनी सारी माता के बारे में सुनकर मन भावुक रहा है लिखने में तो मन बहुत ही छोटा…

दृश्य: सुबह – डॉ. शैलजा सक्सेना ( कविता )

दृश्य: सुबह – डॉ. शैलजा सक्सेना ( कविता ) हवा शान्त है,रात बरसता मेह रुक गया,सड़कें पानी पीकर लेटीं,पत्ते सभी नहाये दिखते,सूरज भी अब बदन पौंछ कर,आने की तैयारी में…

दृश्य: वर्षा – डॉ. शैलजा सक्सेना ( कविता )

दृश्य: वर्षा – डॉ. शैलजा सक्सेना ( कविता ) आज धूप की मुठ्ठी बाँधेसूरज बादल पीछे दुबकाऔर हवा की बन आई हैघर-घर जा कर चुगली करती। सूरज व्याकुल देख रहा…

“एक साँस”- डॉ. शैलजा सक्सेना

“एक साँस”- डॉ. शैलजा सक्सेना साँसों की भीड़ मेंएक साँस है,सब साँसों को साँस बनातीजैसे वो साँस नहींएक पेड़ हो ऑक्सीज़न का! जब दिन की भाग–दौड़ में साँसें शोर मचाती,सब…

इंटरनेट की सड़क पर : डॉ. शैलजा सक्सेना

इंटरनेट की सड़क पर – ( कविता ) हमने इंटरनेट की भीड़-भरी सड़क पर ढूँढ ही लिया एक छोटा-सा कोना, बतियाने के लिये। अब परीक्षा है हमारी कि बिना चेहरा…

शैलजा सक्सेना की कहानियाँ: रिश्तों, संघर्षों और उम्मीदों की दास्तान – (पुस्तक समीक्षा)

“प्रवासी कथाकार शृंखला” राकेश मिश्र शैलजा सक्सेना जी से मेरा परिचय हिंदी राइटर गिल्ड के मासिक कार्यक्रम में हुआ। उनकी लिखी कहानियों को पढ़ने से पहले मैंने उन्हें सुना है…

हिंदी दिवस: एक दिन के लिए नहीं बल्कि जीवन भर का उत्सव – (संपादकीय-2)

हिंदी दिवस: एक दिन के लिए नहीं बल्कि जीवन भर का उत्सव शैलजा सक्सेना मित्रो, हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनायें! वर्ष में दो दिन, १४ सितंबर को ‘हिंदी दिवस’ और…

फ़्लू – (लघु कथा – अनुवाद)

फ़्लू डॉ. शैलजा सक्सेना आज विभाग के मुख्यसचिव दौरा करने आ रहे थे। पिछले बार जब मुख्यसचिव आए थे तब नीता असिस्टेंट सैक्शन ऑफिसर बनी ही थी। उस को यह…

गाँठ में बाँध लाई थोड़ी सी कविता – (कविता)

गाँठ में बाँध लाई थोड़ी सी कविता आँचल की गाँठ मेंहल्दी-सुहाग मेंसाथ-साथ बाँध लायी अम्माँ की कविता!चावल-अनाज मेंखील की बरसात सेथोड़ी सी चुरा लायी जीवन की सविता!मढ़िया की भीत पेसगुन…

आज की कविता – (कविता)

आज की कविता ऐसी चली हवा कि …मेरी कविता की कल्पना बेल सूख गई अचानकछन्दों की नगरी में मची ऐसी भगदड़कि कोई दोहा और चौपाई तक पीछे नहीं छूटाऔर सारा…

कैनेडा में सुबह – (कविता)

कैनेडा में सुबह सुबह हो गईपग-पगबढ़ते-चढ़ते पथ परभीड़ हो गई!बोला कहीं क्या काला कव्वा?शीत पवन में पंख जम गयेबानी-बोली सभी खो गईसुबह हो गई॥ आँखों के आगेबस टिक-टिक घड़ी नाचतीऊपर…

भाषा की खोज – (कविता)

भाषा की खोज पूरा दो साल का होने को आया बच्चाअभी भी चुप हैसबको फिकर है . . .बोलना शुरू किया क्या?? बच्चा, चुप देखता है,समझता है सब,समझा भी देता…

लेबनॉन की एक रात…. – (कहानी)

लेबनॉन की एक रात…. डॉ. शैलजा सक्सेना १२ अगस्त १९४५! दूसरी बड़ी लड़ाई का समय! लेबनॉन के यहूदी लोग छोटे-छोटे समूहों में छिप कर अपनी ज़मीन पर अपना देश बनाने…

शैलजा सक्सेना की कविताएँ

1. चिड़िया का होना ज़रूरी है! पेड़ पर फुदकती है चिड़िया पत्ते हिलते, मुस्कुराते हैं, चिड़िया पत्तों में भरती है चमक, डाली कुछ लचक कर समा लेती है चिड़िया की…

कहत कबीर सुनो भई साधो

हिंदी के संत साहित्य में कबीर का अत्यंत महत्त्वपूर्ण स्थान है। चार प्रमुख भक्त कवियों में कबीर सबसे पहले आते हैं। भक्ति काल का समय मुहम्मद बिन तुगलक से शुरू…

ये दुनिया-वो दुनिया

वर्मा जी बहुत परेशान हैं। उनके छठे कहानी संकलन पर एक बड़ी गोष्ठी ज़ूम पर आयोजित की जा रही है और उन्हें यह समझ नहीं आ रहा कि वे कल…

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