प्रेम का छठा कोण ( कविता ) : मंजु गुप्ता
एक प्रेम था- दो हृदयों को जोड़ने वाला
माँ ने उसे ममता बना दिया
पिता ने वात्सल्य
बहन ने स्नेह के धागे में ढाल दिया
पुत्र ने श्रद्धा- सुमन बना दिया।
भक्त ने भक्ति मिला, भगवान पर चढ़ा दिया
मनुष्य ने उसको वसुधैव कुटुम्बकं बना दिया।
शैतान को खुरापात सूझी-
उसने प्रेम का छठा कोण गढ़, उसमें धर्म मिला दिया
और तबसे आज तक दुनिया
धर्म निष्ठा के नाम पर,
एक दूसरे को जिबह कर रही है
जुड़ने के बजाय, कटती जा रही है।
