साहित्य मन का अधिष्ठाता देवता है : विष्णु प्रभाकर
यूनेस्को के घोषणापत्र में लिखा है कि युद्ध मन में ही पैदा होता है और वहीं उसको रोका जा सकता है !
मन में कौन रोक सकता है ?
साहित्य !
साहित्य मन का अधिष्ठाता देवता है !
साहित्य की शक्ति के बारे में हमें बहुत भ्रम हैं ! हमें समझना है कि साहित्य क्रान्ति की भूमिका निभाता है !
रूसी क्रान्ति के पीछे गोगल से लेकर ताल्सताय और गोर्की का साहित्य है !
उसी साहित्य ने जनता को बेचैन किया था ! पुराने मूल्यों के आगे प्रश्न-चिह्न लगाये थे !
फ़्रांस की क्रान्ति के पीछे रूसो और वाल्तेयर का चिन्तन है !
अमरीका से दासता को मिटाने का श्रेय लिंकन को दिया जाता है, सही, किन्तु स्वयं लिंकन ने स्वीकार किया है कि एलीजाबेथ स्टो के उपन्यास टाम काका की कुटिया ने जनमानस में दासता के विरुद्ध जो उथल-पुथल मचा दी थी, वह न होती तो मैं कुछ नहीं कर पाता !
हमारे देश के स्वाधीनता-संग्राम में साहित्यकारों का योगदान महत्त्वपूर्ण रहा है, नहीं तो अंग्रेज-सरकार अनेक पुस्तकों को जब्त क्यों करती ?
