दिन विशेष नवोदित रचनाकार में दिनेश सेन शुभ की कविता
दिनेश सेन ‘शुभ’ महाराजपुर, जबलपुर निवासी शासकीय सेवक एवं शोधार्थी हैं। उनका एकल काव्य-संग्रह ‘पराधीन परिणीता’ प्रकाशित है। उनकी कविताएँ एवं कहानियाँ विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित तथा आकाशवाणी, माय एफएम और समाचार चैनलों से प्रसारित होती रही हैं। वे जनभाषा हिंदी डॉट कॉम में संपादक, संस्कारधानी के स्वर के संयोजक तथा वैश्विक हिंदी महासभा, महाकौशल इकाई में सह-सचिव हैं। वे विभिन्न प्रादेशिक कवि सम्मेलनों में सक्रिय सहभागिता करते हैं।

युद्ध
जिस मन में हो भरी ग्लानि
वो अब क्रुद्ध नहीं होगा
माधव ! हमको क्षमा करो
अब हमसे युद्ध नहीं होगा
माधव! मन करता है अबकी
सबको माफ किया जाए
सोच लिया जो हुआ हुआ जो
न इंसाफ किया जाए
सब को खत्म करूं फिर भी तो
अब सब शुद्ध नहीं होगा
माधव! हमको क्षमा करो
अब हमसे युद्ध नहीं होगा।।
भाई दुशासन, दुर्योधन
के दुर्व्यहारों के ही कारण
भीष्म पितामह, गुरु द्रोण
के सम्मुख है गांडीव धारण
पाला पोसा बड़ा किया
मन तिन अवरुद्ध नहीं होगा
माधव ! हमको क्षमा करो
अब हमसे युद्ध नहीं होगा
लिख रहे हैं
लिख रहे हैं
भाग्य अपना लिख रहे हैं
लिख रहे हैं
खुशियों को अपनी जलाए जा रहे हैं
जिंदगी ऐसी हम निभाए जा रहे हैं
लीख में हम हल चलाए जा रहे हैं
फूल कांटे सब उगाए जा रहे हैं
ठीक वैसे हैं नहीं हम
ठीक जैसे दिख रहे हैं
लिख रहे हैं
लिख रहे हैं भाग्य अपना लिख रहे हैं
लिख रहे हैं
जिसने जो ताने सुनाए सुन लिया है
रास्ता जीवन का अपने चुन लिया है
अपने सपनों का घरौंदा बुन लिया है
रास्ता जीवन का अपने चुन लिया है
उतने सस्ते हैं नहीं हम
जितने सस्ते बिक रहे हैं
लिख रहे हैं
भाग्य अपना लिख रहे हैं
लिख रहे हैं
