अवधी-गीत : प्रदीप सारंग
संक्षिप्त परिचय : प्रदीप सारंग
जन्म: 20 अक्टूबर 1969
5- शिक्षा: बीए बीएड, साहित्य रत्न, आयुर्वेद रत्न
6- प्रकाशित कृति: (i) सारंग-कुण्डलियाँ (151 कुण्डलियों का संग्रह) (ii) सारंग-हुण्डलियाँ (151 हुण्डलियों का संग्रह)
7- संपादित: बाराबंकी के हिंदी साहित्य इतिहास (शोध संदर्भ)
8- सम्मान: शताधिक साहित्यिक सामाजिक संस्थाओं द्वारा विभिन्न अलंकरणों से सम्मानित। आकाशवाणी व दूरदर्शन में अनेक बार अवधी गीत/कविता पाठ। कवि सम्मेलनों में गीतकार के रूप में पाठ।
सम्पर्क: ग्राम-कमरावों, पोस्ट- नानमऊ, जिला-बाराबंकी, उप्र। मेल- reportersarang@gmail.com

अवधी-गीत
सजना निकितना करैं न पियार,
जिनिगिया कइसन पार होइहै।
यकु लड़िका यकु लड़की
हमरे अँगना मा किलकारैं।
देखि पड़ोसी के छः लड़िका,
इनहू बाट निहारैं।।
उनके सोंचै क अलगु संसार,
जिनिगिया कइसन पार होइहै।।
सजना निकितना करैं…………….
जब टीका लगवावा चाहेन,
तनिकौ ध्यान न लावैं।
याकौ बात हमारि न मानैं,
अपनै राग सुनावैं।।
घरु भरि समुझाय कै गये हारि,
जिनिगिया कइसन पार होइहै।।
सजना निकितना करैं…………….
बूढ़े बुजरुग अम्मौ बप्पा,
लरिकै के गुन गावैं।
प्यार दुलार करब न जानैं,
करुये बोल बहावैं।।
नाहीं भये याकौ सपन सकार
जिनिगिया कइसन पार होइहै।।
सजना निकितना करैं…………….
पढ़ी लिखी हन सबुई सुधरिबै,
रोजु-रोजु समुझइबै।
उन्नत बंशु होय लरिकन ते,
तिनका खूब पढ़इबै।।
धरती पर फैलइबै उजियार,
जिनिगिया अइसन पार होइहै।।
सजना निकितना करैं…………….
