दिन विशेष अनुवाद में मु. मेत्ता की तमिल कविता का डॉ. जमुना कृष्णराज द्वारा हिन्दी अनुवाद
डॉ. जमुना कृष्णराज हिंदी एवं तमिल की विदुषी, लेखिका, अनुवादक और साहित्यकार हैं। उन्होंने हिंदी एवं अंग्रेजी में एम.ए. तथा हिंदी में पीएच.डी. की है और अनुवाद में डिप्लोमा प्राप्त किया है। उनकी रचनाओं में शब्द-संयम, मानव की खोज, मन की पुकार, तिलमिलाई स्वतंत्रता सेनानी माँ, अण्णा, अनुभूति, माँ झाँसी और राष्ट्रभक्ति जैसी कविताएँ तथा सामाजिक सरोकारों से जुड़ी कहानियाँ शामिल हैं। उनकी रचनाएँ देश की विभिन्न प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रही हैं।
वर्ष 2022 में उन्हें तमिलनाडु के मुख्यमंत्री से उत्कृष्ट अनुवादक का पुरस्कार प्राप्त हुआ। इसके अतिरिक्त उन्हें कासम्मा बोइन पुरस्कार, कादंबरी संस्था एवं विद्युतिमा फाउंडेशन सहित अनेक साहित्यिक सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है। वर्ष 2019 में साहित्यकार सम्मान, 2018 में रायबरेली विश्व हिंदी सम्मेलन में सम्मान तथा 2017 में तमिलनाडु हिंदी साहित्य अकादमी सम्मान भी प्राप्त हुआ। उन्हें केंद्रीय हिंदी निदेशालय का द्वितीय भाषा हिंदी लेखक पुरस्कार, 2024 का सम्मति सम्मान तथा 2025 का नली डिपार्टमेंट अनुवादित साहित्य सम्मान भी प्राप्त हुआ है। वर्तमान में वे स्वतंत्र लेखन कर रही हैं।

कण्णीर पूक्कळ
कण्णीर पूक्कळ
कण्णीर पूक्कळ
उलगेंगेुम इदळ् इदळ्गा
कण्णीर पूक्कळ
उदिरन्दु विऴुवदु यारुक्काग?
एन देव देवनुडैय
काल्गळै अर्चित्क इवै
कण्विऴिक्कि न्द्रन?
अऴगिय निरमुमिल्लामल् मणमुमिल्लामल्
पूत्त उडने उदिरन्दु पोगिर इवैट्रै
यार् वाङ्गुवार्?
इवै
एवरुक्कु वेण्डुमानालुम वऴङ्गप्पडुगिन्ड्र
इलवचप्पूर्गळा? इल्लै-
कनमागिप्पोगाद मन अणैक्कट्टिन्
कशिवु———
वेदनैयिन्
गुण्डु विळैयाट्टु——
कायन्द निनैवुगळिल् वेरप्पिडित्तु
कलङ्गुम
इददयच्चेडिगळिन् काणिक्कै.
तूक्कत्तिन अडैयाळच्चिन्नम
करुप्पल्लवा——–
एन इन्द विऴि वेळ्ळैक्कोडि पिडिक्किरदु?
चण्डै पिडिक्क मुडियादपोदु समरसम सेय्तु कोळ्ळ
समाधानप्पुरा तयारागिरदा?
दुक्क्कक्कदवुगळैत्तिरन्दुविट्टु
तूक्कक्कदवुगळै अडैत्तुक्कोळ्ळुम चावि
इदनिडमदान इरिक्किरदु.
वासनैयिल्लाद इन्दप्पूर्गळ्दान
इदसमुळ्ळ एनद मनिदनैयुम
इन्नोरुवरुक्काग ईरप्पडुत्तुम.
इन्द नीर्पूर्गळैक्कोडुककुम
चेडियिन नीळम
मनक्कुळ्ळिन तुयरमट्टत्तै पोरुत्तै
नीळुम-ताऴुम.
एङ्गेल्लाम मानुडम कायप्पडुगिरदो
अङ्गेल्लाम पूक्कुम
सगोदर सोगङ्गळिन सर्वदेच पूक्कळ्
इवैदान.
एन्रालुम
इन्द पूक्कळैप्पूत्तुत्तरुगिर कोडि
एऴैक्गुडिसैगळिन मीदुदान
एरियेरुम.
ओरु इदळिल् इत्तनै सूडाग
इरुन्दाल अन्दच्चेडियिन अडियिल्
एत्तनै युगङ्गळिन वेप्पम
सेमिक्कप्पट्टिरुक्कुम?
इन्द नेयत्तुळिगळ् विऴुन्द पिरगे
नेरुप्पु पत्रुगिरदु.
पिरगुदान एऴुच्चि विळक्कुगळ् एरिगिन्ड्रन.
एरियेप्पोगुम तीयै
एदुत्तुक्काट्टुम कण्णाडिया इदुक? पोराट्टङ्गळैत्तूण्डि विडुवदुम
पोराडुम्पोदु तूबप्पडुवदुम
इन्दप्पूर्गळे!
एनत्तुयरत्तिर्को इवै
साच्चियम सोल्गिन्ड्रन.
इवैट्रुक्कु साच्चियङ्गळागवे
एङ्गळ् कविदैगळ् पिरिक्किन्ड्रन.
एङ्गळ् कविदैगळुक्कु
साच्चियम कूर्प्पोदु एदु?
ये पुष्प
ये पुष्प
ये पुष्प
विश्व भर में पंखुड़ी दर पंखुड़ी
ये पुष्प
झरते हैं किसके लिए?
किस देव-देवता के
चरणों की अर्चना करने ये
नयन उन्मीलित कर रहे हैं?
इनमें रूप-रंग, न महक
खिलते ही झरते इन्हें
कौन खरीदे?
ये
क्या हर किसी को अदा किए जाते
मुफ़्त के फूल हैं? नहीं-
भारविहीन मन-बांध के
रिसाव——–
वेदनाओं की
बम-क्रीड़ा—— सूखी यादों में जड़ पकड़
विचलित
हृदय-पौधों की भेंट।
दुख का चिह्न
तो काला है—–
यह आँख की पुतली क्यों श्वेत झंडा फहरा रही है?
युद्ध की असमर्थता पर
समझौते के लिए
शांतिदूत कबूतर क्या तैयार हो रहे हैं?
दुख-द्वार खोल
निद्रा-द्वार बंद करने की कुंजी
इसी के पास है।
बेख़ुशबू ये पुष्प ही
किसी भी सहृदय व्यक्ति को
परहित में द्रवित करते हैं।
इन नीर-पुष्पों के
पौधों की लंबाई
हृदय-जलाशय के शोक-तल के अनुरूप ही
बढ़ती-घटती है!
जहाँ-जहाँ मानवीयता पर आघात होता है
वहाँ पुष्पित
भ्रातृत्व शोक के सार्वभौमिक पुष्प
ये ही हैं।
तथापि
इन पुष्पों को पुष्पित करती लताएँ
गरीबों की झोंपड़ियों पर ही
चढ़कर फैलती हैं।
एक पंखुड़ी में इतना ताप
तब उस पौधे की तल में
कितने युगों का ताप संचित हुआ होगा?
इन घृत-बूंदों के पड़ने पर ही
आग सुलगती है।
तब जाकर जागृति के दीपक जलते हैं।
क्या यह धधकती अग्नि को
दर्शाने वाला दर्पण है?
संघर्ष को भड़काते और
संघर्ष के समय बिखेरे जाते
पुष्प ये ही हैं!
किसी व्यथा की ये
गवाही दे रहे हैं।
इन्हीं की गवाही में
हमारी कविताएँ उत्पन्न होती हैं।
हमारी कविताओं की
गवाही कौन दे?
