“अपने अपने बुर्ज ख़लीफ़ा“ (पुस्तक-परिचय)

हर व्यक्ति के जीवन के कुछ महत्वपूर्ण प्रतिमान होते हैं और वह उन तक पहुँचने की क्षमता का विकास किस प्रकार से कर सकता है यही उपन्यास का मुख्य बिंदु भी है और प्रेरक केन्द्र भी है। सकारात्मक ऊर्जा से भरा हुआ ये उपन्यास “जागृति “से “जागती “ के नाम से पुकारी जाने वाली रस्सी पर करतब दिखाती उस लड़की की कहानी है जो युवा हो रही है और उसी दौर में उसे अपने आसपास ऐसे लोग मिलते हैं जो उसकी क्षमताओं को समझते हैं और फिर वो लड़की एक सिलेब्रिटी बन जाती हैं। विदेशों में ख्याति मिलती है और अचानक कुछ ऐसा घटित होता है कि वो लड़की ऊंचाइयों से नीचे आ जाती है।
पूरा उपन्यास प्रवाह के साथ आगे बढ़ता है और कई देसी विदेशी पात्र जुड़ते हैं। युवा होती लड़की के मनोभावों को, उसके सम्मोहन को ,पुरुष के प्रति उसके आकर्षण को बहुत ही गहराई से रेखांकित किया गया है। यूँ तो जयंती की कहानियों व उपन्यासों के पात्र हमेशा से ही नवीन धरातल से जुड़े होते हैं पर रस्सी पर करतब दिखाती लड़की की जिजीविषा, उसके साहस व कौशल को साधने की प्रक्रिया उपन्यास का मूल तत्व है और एक नट लड़की को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करना भी है।
इस उपन्यास की विशेषता यह भी है कि उस लड़की के संघर्ष में परिवार के सभी लोग, समाज के लोग यहां तक कि उसके साथ व्यवसायिक रूप से जुड़े हुए लोग भी अन्त तक उसका साथ देते हैं। कहीं- कहीं तो लगता है कि यहाँ पर सभी निःस्वार्थ भाव से उससे जुड़े कैसे हैं? क्या ऐसा आम जीवन में संभव है पर यही तो कहानी की सकारात्मकता है जो नवीन ऊर्जा देती है और प्रेरित करती है। जयंती रंगनाथन के इस उपन्यास पर एक नट लड़की की “बॉयोपिक” बन सकती है। उपन्यास शिवना प्रकाशन से प्रकाशित हुआ है।
– अनीता वर्मा

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