पिताश्री स्वर्गीय श्री शिव प्रसाद बंद्योपाध्याय की पुण्य स्मृति में(29 अगस्त 1941–10 अप्रैल 2026)- सोमा बंद्योपाध्याय

बंगाल के बीरभूम की पावन मिट्टी में जन्मे,
उसके संस्कारों में पले,
उन्होंने सीमा सड़क संगठन के साथ सेवा का पथ चुना।
एक ऐसा जीवन, जो शांत परंतु दृढ़ता, अटूट साहस और निःस्वार्थ समर्पण से भरा था।
40 वर्षों तक उन्होंने राष्ट्र के प्रति पूर्ण निष्ठा से सेवा की,
वहाँ भी मार्ग बनाए जहाँ कोई राह नहीं थी।
राजस्थान के मरुस्थलों से लेकर कभी नाथुला पास, तो कभी लद्दाख की ऊंची बर्फिली चोटियों तक,
कश्मीर की वादियों से लेकर उत्तर-पूर्व के सुदूर चीन की सीमा तक,
उनकी निष्ठा की कोई सीमा नहीं थी — जो विदेश में दूरस्थ लीबिया तक भी पहुंची।
उन्होंने हर संकट का सामना साहस से किया,
हर कठिनाई का सामना बुद्धिमत्ता से किया,
और हर चुनौती को अडिग मनोबल के साथ पार किया।
परंतु वर्दी से परे, वे अपार दया और करुणा से भरे इंसान थे,
गांव से लेकर पहाड़ तक अनगिनत जीवनों को सहारा दिया ,
संवेदना और उदारता से पल- पल संवार दिया।
एक स्नेही पिता, एक मार्गदर्शक गुरु, परिवार के अटूट आधार,
और अपने नाती-पोतियों के लिए स्नेह और अपनत्व का संपूर्ण संसार।
भले ही आज हमारी आँखों से ओझल हो गए हो आप,
पर आपका अस्तित्व हर उस जीवन में जीवित है जिसे आपने स्पर्श किया,
और उन मूल्यों, शक्ति और प्रेम में भी जो आप हमें सौंप गए ।।

Mr. Siba Prasad Banerjee, born on August 29, 1941 in Birbhum district of West Bengal, a civil engineer by profession served in the Border Roads Organisation (General Reserve Engineering Force), a paramilitary wing of Indian Armed Forces. He served in the most war-prone border areas of the country- Ladakh, Jammu & Kashmir, North-East including Arunachal Pradesh, Assam, Nagaland, Manipur, Tripura and Mizoram. He dedicated 40 years of his life in the service of the mother Nation and was known for his sincerity, honesty, courage and indomitable spirit.

नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः ।
न चैन क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुतः ॥

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