Category: संगीता चौबे पंखुड़ी

“धरती ने भिजवाई पाती” : संगीता चौबे ‘पंखुड़ी’

“धरती ने भिजवाई पाती” : ( कविता ) धरती ने भिजवाई पातीजिसमें पीड़ा और उदासीझर झर उसके आँसू बहतेतेज गति से तरु जब कटते…. सुनो मनुज! अब मेरी गाथाकब तक…

लेखनी में धार हो – (कविता)

संगीता चौबे पंखुड़ी, कुवैत ***** लेखनी में धार हो वीर रस की हो प्रचुरता, ओज का अंगार हो।हर सदी की माँग है यह, लेखनी में धार हो ।। लिख सके…

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