“चाय की मिठासक्ष” – सांद्रा लुटावन
सुबह की शुरुआत हो या शाम का समाँ,
चाय हर पल को बना देती है सुहाना।
कभी हल्की भाप में सुकून मिलता है,
कभी एक प्याले में अपनापन खिलता है।
चाय की खुशबू मन को भा जाती,
थकान को पल भर में दूर भगाती।
दूध वाली चाय का अपना स्वाद होता,
बिना दूध के भी उसका अलग अंदाज़ होता।
कोई चीनी मिलाकर मीठा बनाता,
कोई बिना चीनी के स्वाद को अपनाता।
हर व्यक्ति की पसंद निराली होती,
पर चाय सबके दिल की सहेली होती।
अदरक वाली चाय मन को गरमाती,
इलायची की महक दिल को लुभाती।
कभी तुलसी का स्वाद सेहत लाता,
कभी लेमन टी ताज़गी बरसाता।
गरम चाय बारिश में भाती है,
सर्दी में भी राहत पहुँचाती है।
और जब गर्मी का मौसम आता,
ठंडी चाय भी मन को लुभाता।
फ्रिज की ठंडी चाय का मज़ा निराला,
हर घूंट लगे जैसे खुशियों का प्याला।
कभी दोस्त के संग बातें सजती हैं,
कभी तन्हाई में यादें जगती हैं।
चाय सिर्फ एक पीने की चीज़ नहीं होती,
यह रिश्तों की मधुर डोर भी होती।
हर प्याले में छुपा होता प्यार,
इसी से रोशन होता जीवन संसार।
चाय की हर चुस्की में सुकून समाया है,
इसने हर दिल को अपना दोस्त बनाया है।
गरम हो या ठंडी, हर रूप प्यारा लगता,
चाय का स्वाद जीवन को और सुंदर बनाता।
