बुढ़ापा बनाम अनुभव ( कविता ) : मंजु गुप्ता
बुढ़ापा बिन बुलाए आता है
अनुभव परिश्रम से कमाया जाता है।
बुढ़ापा लाचारी, अनुभव जौहरी पारखी
बुढ़ापा तोड़ता है, अनुभव सिखाता
बुढ़ापा उम्र की मजबूरी, अनुभव खजाना बेशकीमती
बुढ़ापा फर्राटे भरती गाड़ी पर लगा ब्रेक
अनुभव उत्साही मन की उच्छल तरंग
बुढ़ापा मन वीणा के टूटे तार
अनुभव मन वीणा पर गाया जाने वाला अनहद
बुढ़ापे को नहीं, अनुभव को सहेजिए
बूढ़े नहीं, अनुभवी बनिए
बुढ़ापै को कोसिए बेझिझक
पर अनुभव को बांटिए दूर तलक
बुढ़ापे में पके बाल डराते हैं
अनुभव में पके बाल सुहाते हैं
चुनाव आपका, बूढ़े बनिए या अनुभवी
एक ही सिक्के के दो पहलू
बुढ़ापा बनाम अनुभव
