योगाभ्यास ( कविता ) : डॉ. जमुना कृष्णाराज
योग की कक्षा में मुझे
दिया गया योगाभ्यास।
श्वास लेने और छोड़ने की
विधि मुझे बताई गई।
तब मैं श्वास के अनेक प्रकारों से
अवगत होकर चिंतन में डूब गई।
दैनंदिन भागदौड़ कर
हम लेते हैं उच्छ्वास।
नवजात की पहले श्वास पर
हम लेते हैं खुशी की साँस।
प्रदूषित पर्यावरण में हमारी
घुटती है साँस।
कठोर परिश्रम पर हमारी
फूलती है साँस।
तो सुखदायक माहौल में हम
छोड़ते हैं चैन की साँस।
अतः जन्म से लेकर मरण तक
अनजाने में हम करते हैं योगाभ्यास।
इस लंबी यात्रा से थक कर जो
लेते हैं हम अंतिम साँस,
वही बनती है संकेत अगले जन्म
की कड़ी की पहली साँस।
