अनहद नाद ( कविता ) : अनीता वर्मा
हमें सुनना होगा भीतर के कोलाहल को
समेटना होगा उसे अपनी आत्म शक्ति से
स्वयं से जुड़ने के लिए ज़रूरी है
जुड़ना उस ध्वनि से
जो गुंजन करती है
हम सबके भीतर
हर समय हर क्षण
क्षमता रहती है विकास की अभ्यास की
वियोग से योग की अवस्था तक
कठिन नहीं है पहुँचना और जुड़ना
हर सुबह सुनो साँसों की लय ताल को
आवाज़ दो अपने भीतर के विश्वास को
यह कहते हुए
अहं केवलं अहमेव अस्मि
मम सदृशः कोऽपि नास्ति
मैं सिर्फ़ मैं हूँ सिर्फ़ मैं ही तो
ओम से उत्पन्न होकर ओम के प्रभाव तक
