महादेवी वर्मा और निराला की राखी

बात सन 1951 की है। उस दौर के लगभग सभी बड़े साहित्यकार महादेवी वर्मा को बड़ी दीदी कहकर पुकारते थे। इनमें जयशंकर प्रसाद, सुमित्रा नंदन पंत, सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ प्रमुख थे। सबसे प्रिय सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ माने जाते थे। उनसे जुड़ी एक रोचक बात आज भी साहित्यकारों के बीच चर्चित है। बताया जाता है कि निराला, जयशंकर प्रसाद और सुमित्रा नंदन पंत देश के किसी भी हिस्से में रहें लेकिन वह रक्षा बंधन पर महादेवी वर्मा से राखी बंधवाने जरूर पहुंचते थे। एक बार रक्षा बंधन पर निराला के पास पैसे नहीं थे। किसी तरह वह राखी बंधवाने महादेवी के इलाहाबाद स्थित आवास पर पहुंचे। घर पहुंचते ही रिक्शे वाले को पैसा देना था और राखी के साथ मिठाई भी खरीदनी थी। निराला ने जरा भी संकोच नहीं किया। आवाज लगाई ‘दीदी, जल्दी आओ’। महादेवी वर्मा के घर से निकलते ही निराला तपाक से बोल उठे, दीदी 12 रुपये दे दो। महादेवी ने उन्हें 12 रुपये देते हुए पूछे, जरा यह तो बताओ कि अचानक 12 रुपये की क्या जरूरत पड़ गई। इस पर निराला ने बड़े ही मासूमियत से जवाब दिया कि इसमें से दो रुपये रिक्शे वाले को देने हैं, बाकी से मिठाई व राखी लानी है और फिर तुम्हें भी तो देने हैं। निराला की यह बात सुन महादेवी भावविभोर हो गईं। आर्शीवाद देते हुए कहा, तुम खूब नाम कमाओगे।
