Category: प्रवासी लेख एवं अन्य विधाएं

चीन में हिंदी का विकास

भारत एवं चीन विश्व की चार सबसे पुरानी सभ्यता वाले देश हैं जिनके मध्य दो सहस्त्र वर्षों के सांस्कृतिक आदानप्रदान का इतिहास रहा है I दोनों देश सदियों से एक…

चीन में बारिश का रोमांच

“जल” मानव अस्तित्व के अपरिहार्य कारकों में से एक है, इसीलिए मानव सदियों से नदियों के किनारे हीं वास करता आया है। मानव सभ्यता की उत्पति भी नदियों के किनारों…

महात्मा गाँधी एवं चीन

भारत एवं चीन विश्व के चार महान सभ्यताओं में शामिल है, दोनों देशों के मध्य २००० वर्षों के मैत्री सम्बन्ध का इतिहास रहा है I दोनों देशों के मध्य उच्च…

सब बिज़ी हैं!

सब बिज़ी हैं! जी, सभी व्यस्त हैं ऐसा भी लिखा जा सकता था किन्तु वह यथार्थ का परिमार्जित संशोधित रुप होता अर्थात् व्याकरणीय छन्नी से छानकर आदर्श की मिलावट के…

स्त्री विमर्श में ‘स्त्री’

दैहिक, वैचारिक, आर्थिक अथवा सामाजिक समता एवं स्वतंत्रता? आख़िर वह कौन सी धुरी है जिसके इर्द-गिर्द, गले में नारीवाद की घंटी लटकाकर कोल्हू के बैल सदृश जुते हुए विचारक, वर्षों…

विश्व हिन्दी दिवस विशेष आलेख

10 जनवरी 1974 में नागपुर में आयोजित पहले विश्व हिंदी सम्मेलन की वर्षगाँठ को चिह्नित करने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के द्वारा 10 जनवरी 2006 से एक…

प्रवासी लेखन में ‘नौसटैलजिया’

दिव्या माथुर समय तेजी से बदल रहा है, जाहिर है कि हमारे साहित्य में भी यह बदलाव, व्याकुलता और बेचैनी छलक रही है जो हिन्दी साहित्य को अपनी मौलिकता से…

मॉरीशस में हिन्दी का स्वरूप और भविष्य

मॉरीशस में हिंदी के स्वरूप को यदि हम जानना चाहते हैं तो इतिहास में झाँके बगैर हम इस दिशा में आगे नहीं बढ़ सकते । जब हम ऐतिहासिक तथ्यों को…

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