दिन विशेष कविता : “बुंदेली चौकड़ियां” – प्रभु दयाल श्रीवास्तव पीयूष टीकमगढ़
दिन विशेष कविता : “बुंदेली चौकड़ियां” – प्रभु दयाल श्रीवास्तव पीयूष टीकमगढ़ गोपीं गोविंद के गुन गाबें,बड़े भोर उठ जाबें।जुर मिल जे जमुना के जल में,बुड़की रोज लगाबें।कात्यायनि मइया की…
