Category: मनोज मोक्षेन्द्र

अव्यक्त को व्यक्त करने की क्षमता है, अनिल प्रभा में : डॉ. मनोज मोक्षेंद्र

अव्यक्त को व्यक्त करने की क्षमता है, अनिल प्रभा में : डॉ. मनोज मोक्षेंद्र समीक्षित पुस्तक: “शिवना कथा सप्तक : अनिल प्रभा कुमार’प्रकाशक : शिवना प्रकाशनविधा : कहानीकथाकार : अनिल…

शब्द-सारथी की सहमति में दिव्या माथुर की कहानियाँ – डॉ. मनोज मोक्षेंद्र

शब्द-सारथी की सहमति में दिव्या माथुर की कहानियाँ – डॉ. मनोज मोक्षेंद्र (दिव्या माथुर की कहानियां : एक सूक्ष्मावलोकन) चुनिंदा कथाकार ऐसे होते हैं जो शून्य से शुरू तो होते…

दिन विशेष व्यंग्य : पेट्रोल महागाथा – डॉ. मनोज मोक्षेन्द्र

दिन विशेष व्यंग्य : पेट्रोल महागाथा – डॉ. मनोज मोक्षेन्द्र डेढ़ किलोमीटर लंबी कतार में बिल्कुल आख़िरी छोर पर खड़े मियाँ अज़ायब ख़ान को दूरबीन से देखकर ही पहचाना जा…

दिव्य माथुर की पुस्तक ‘बिन्नी बुआ का बिल्ला’ की डॉ. मनोज मोक्षेंद्र द्वारा समीक्षा

दिव्य माथुर की पुस्तक ‘बिन्नी बुआ का बिल्ला’ की डॉ. मनोज मोक्षेंद्र द्वारा समीक्षा समीक्षित पुस्तक : बिन्नी बुआ का बिल्लाविधा : बाल उपन्यासउपन्यासकार : दिव्या माथुरप्रकाशक : डॉ. नीरज…

दिन विशेष (व्यंग्य) में ‘छींक पुराण’ : डॉ. मनोज मोक्षेन्द्र

दिन विशेष (व्यंग्य) में ‘छींक पुराण’ : डॉ. मनोज मोक्षेन्द्र परिचय : डॉ. मनोज श्रीवास्तव, जिनका लेखकीय नाम ‘मनोज मोक्षेन्द्र’ है, समकालीन हिंदी साहित्य के प्रतिष्ठित साहित्यकार, व्यंग्यकार, कथाकार, कवि,…

पुस्तक समीक्षा : ‘लेबनॉन की वो रात’ — शैलजा सक्सेना

पुस्तक समीक्षा : ‘लेबनॉन की वो रात’ — शैलजा सक्सेना पुस्तक समीक्षा :समीक्षित पुस्तक : ‘लेबनॉन की वो रात’विधा : कहानी-संग्रहकहानीकार : शैलजा सक्सेनाशृंखला-संपादक : तेजेन्द्र शर्माप्रकाशक : प्रलेक प्रकाशन…

हिन्दीतर प्रांतों में हिंदी की स्थिति और हिन्दीतर क्षेत्रों के हिंदी समर्थक (शोध-पत्र): डॉ. मोक्षेन्द्र

हिन्दीतर प्रांतों में हिंदी की स्थिति और हिन्दीतर क्षेत्रों के हिंदी समर्थक (शोध-पत्र) : डॉ. मोक्षेन्द्र इस शोध-पत्र में हिंदीभाषी और हिंदीतर भाषी क्षेत्र के रूप में समूचे विश्व को…

तेजेंद्र शर्मा के कहानी-संग्रह “संदिग्ध” की डॉ. मनोज मोक्षेन्द्र द्वारा समीक्षा

तेजेंद्र शर्मा के कहानी-संग्रह “संदिग्ध” की डॉ. मनोज मोक्षेन्द्र द्वारा समीक्षा तेजेंद्र शर्मा की कहानियाँ हमें जीवन के बहुकोणीय अहसासों की दुनिया में विचरण कराती हैं। मानवीय रिश्तों के विभिन्न…

मनोज मोक्षेंद्र द्वारा दिव्या माथुर की पुस्तक ‘कलाइडोस्कोप’ की पुस्तक समीक्षा

मनोज मोक्षेंद्र द्वारा दिव्या माथुर की पुस्तक ‘कलाइडोस्कोप’ की पुस्तक समीक्षा प्रख्यात प्रवासी साहित्यकार दिव्या माथुर का संस्मरण “कलाइडोस्कोप : सतरंगी स्मृतियाँ” उनके जीवन के व्यापक अनुभवों, भौतिक-बौद्धिक गतिविधियों, भावनात्मक…

दिन विशेष विमर्श में ‘अलकनन्दा सुत’ : अर्चना पैन्यूली के उपन्यास पर डॉ. मनोज मोक्षेन्द्र की समीक्षात्मक दृष्टि

दिन विशेष विमर्श में ‘अलकनन्दा सुत’ : अर्चना पैन्यूली के उपन्यास पर डॉ. मनोज मोक्षेन्द्र की समीक्षात्मक दृष्टि ‘अलकनन्दा सुत’ प्रवासी लेखिका अर्चना पैन्यूली का एक सामाजिक-पारिवारिक उपन्यास है. इस…

नया ठाकुर

सुबह के आठ बजते-बजते सूरज भड़भूजे की भट्ठी की तरह दहकने लगा था। वह पूरा जोर लगाकर लगभग भागते हुए, पीछा कर रहे सूरज के लहकते गोले की लपट से…

नदी का दुःख

गहराई के खोने का दुःख नदी ही जान सकती है, गहराई ही उसकी तिजोरी थी जहाँ वह सहेजती थी—पुराण और इतिहास रहती थी अपने जाये जलचरों संग नदी बार-बार टटोलती…

मनोज मोक्षेन्द्र

पिता : (स्वर्गीय) श्री एल.पी. श्रीवास्तव, माता : (स्वर्गीया) श्रीमती विद्या श्रीवास्तव जन्म-स्थान : वाराणसी, (उ.प्र.) शिक्षा : जौनपुर, बलिया और वाराणसी से (कतिपय अपरिहार्य कारणों से प्रारम्भिक शिक्षा से…

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