Category: मनोज मोक्षेन्द्र

हिन्दीतर प्रांतों में हिंदी की स्थिति और हिन्दीतर क्षेत्रों के हिंदी समर्थक (शोध-पत्र): डॉ. मोक्षेन्द्र

हिन्दीतर प्रांतों में हिंदी की स्थिति और हिन्दीतर क्षेत्रों के हिंदी समर्थक (शोध-पत्र) : डॉ. मोक्षेन्द्र इस शोध-पत्र में हिंदीभाषी और हिंदीतर भाषी क्षेत्र के रूप में समूचे विश्व को…

तेजेंद्र शर्मा के कहानी-संग्रह “संदिग्ध” की डॉ. मनोज मोक्षेन्द्र द्वारा समीक्षा

तेजेंद्र शर्मा के कहानी-संग्रह “संदिग्ध” की डॉ. मनोज मोक्षेन्द्र द्वारा समीक्षा तेजेंद्र शर्मा की कहानियाँ हमें जीवन के बहुकोणीय अहसासों की दुनिया में विचरण कराती हैं। मानवीय रिश्तों के विभिन्न…

मनोज मोक्षेंद्र द्वारा दिव्या माथुर की पुस्तक ‘कलाइडोस्कोप’ की पुस्तक समीक्षा

मनोज मोक्षेंद्र द्वारा दिव्या माथुर की पुस्तक ‘कलाइडोस्कोप’ की पुस्तक समीक्षा प्रख्यात प्रवासी साहित्यकार दिव्या माथुर का संस्मरण “कलाइडोस्कोप : सतरंगी स्मृतियाँ” उनके जीवन के व्यापक अनुभवों, भौतिक-बौद्धिक गतिविधियों, भावनात्मक…

दिन विशेष विमर्श में ‘अलकनन्दा सुत’ : अर्चना पैन्यूली के उपन्यास पर डॉ. मनोज मोक्षेन्द्र की समीक्षात्मक दृष्टि

दिन विशेष विमर्श में ‘अलकनन्दा सुत’ : अर्चना पैन्यूली के उपन्यास पर डॉ. मनोज मोक्षेन्द्र की समीक्षात्मक दृष्टि ‘अलकनन्दा सुत’ प्रवासी लेखिका अर्चना पैन्यूली का एक सामाजिक-पारिवारिक उपन्यास है. इस…

नया ठाकुर

सुबह के आठ बजते-बजते सूरज भड़भूजे की भट्ठी की तरह दहकने लगा था। वह पूरा जोर लगाकर लगभग भागते हुए, पीछा कर रहे सूरज के लहकते गोले की लपट से…

नदी का दुःख

गहराई के खोने का दुःख नदी ही जान सकती है, गहराई ही उसकी तिजोरी थी जहाँ वह सहेजती थी—पुराण और इतिहास रहती थी अपने जाये जलचरों संग नदी बार-बार टटोलती…

मनोज मोक्षेन्द्र

पिता : (स्वर्गीय) श्री एल.पी. श्रीवास्तव, माता : (स्वर्गीया) श्रीमती विद्या श्रीवास्तव जन्म-स्थान : वाराणसी, (उ.प्र.) शिक्षा : जौनपुर, बलिया और वाराणसी से (कतिपय अपरिहार्य कारणों से प्रारम्भिक शिक्षा से…

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