Category: अनूप भार्गव

तुम्हारे शब्द मुझ तक पहुँच ही कहां पाते हैं ?

अनूप भार्गव अक्सर जमाने कीज़बरदस्ती ओढाई गईतहज़ीब की चाशनी मेंफ़िसल के लौट जाते हैं , तुम्हारे शब्द मुझ तक पहुँच ही कहां पाते हैं ? तुम्हारे होठों के गोल होने…

गूगल – कुछ प्रेम कविताएं – (कविता)

गूगल – कुछ प्रेम कविताएं 1. क्या तुम्हारा नाम ’गूगल’ है ?क्यों कि तुम में वो सब है ..जो मैं अक्सर ढूँढता रहता हूँ । 2. मेरा प्रश्न पूरा करने…

कविता बनी – (कविता)

कविता बनी टूटते मूल्योंऔर विश्वासों कीशृंखला में जबखुद की खुद से न बनीकविता बनी कल्पना की उड़ान मेंसपनो के जहान मेंमिट्टी के घरोंदे बनातेजब उँगलियाँ सनीकविता बनी फूलों से गंध…

अगले खम्भे तक का सफ़र – (कविता)

अगले खम्भे तक का सफ़र याद है,तुम और मैंपहाड़ी वाले शहर कीलम्बी, घुमावदार,सड़क परबिना कुछ बोलेहाथ में हाथ डालेबेमतलब, बेपरवाहमीलों चला करते थे,खम्भों को गिना करते थे,और मैं जबचलते चलतेथक…

अनूप भार्गव – (परिचय)

अनूप भार्गव हृदय से कवि और व्यवसाय से कंप्यूटर सलाहकार अनूप भार्गव को भोपाल में हुए दसवें विश्व हिंदी सम्मेलन में प्रधान मंत्री द्वारा ‘विश्व हिन्दी सम्मान’ से नवाज़ा गया।…

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