जब प्रसाद जी से मिलने पहुंचे प्रेमचंद और जैनेंद्र (संस्मरण) : जैनेंद्र
जब प्रसाद जी से मिलने पहुंचे प्रेमचंद और जैनेंद्र (संस्मरण) : जैनेंद्र सन् 1933 की बात है। भाई सच्चिदानंद वात्स्यायन अज्ञेय ने कुछ कविताएं अपनी छापनी चाहीं। जेल से उन्होंने…
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जब प्रसाद जी से मिलने पहुंचे प्रेमचंद और जैनेंद्र (संस्मरण) : जैनेंद्र सन् 1933 की बात है। भाई सच्चिदानंद वात्स्यायन अज्ञेय ने कुछ कविताएं अपनी छापनी चाहीं। जेल से उन्होंने…
साहित्य मन का अधिष्ठाता देवता है : विष्णु प्रभाकर यूनेस्को के घोषणापत्र में लिखा है कि युद्ध मन में ही पैदा होता है और वहीं उसको रोका जा सकता है…
एक अविस्मरणीय काव्य संध्या पुणे में – कार्यक्रम सम्पन्न दिनांक : ०४/०७/२०२६, पुणे के आकुर्डी क्षेत्र में एक सुंदर काव्य-संध्या का आयोजन हुआ। यह आयोजन कैम्ब्रिज इंटरनेशनल स्कूल के तत्वावधान…
युवा बोडो साहित्यकारों की रचनाओं से सजा ‘युवा साहित्य’ कार्यक्रम