कवि-लेखक-समीक्षक नरेश शांडिल्य द्वारा सृजित नवीनतम तीन गद्य संग्रहों पर चर्चा का भव्य आयोजन सम्पन्न दिनांक 29.05.2026 को नई दिल्ली के कनाट प्लेस से सटे ऐतिहासिक जनपथ मार्ग पर स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के उमंग सम्मेलन कक्ष में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र, वयम एवं वैश्विक हिंदी परिवार के संयुक्त तत्वावधान में कवि-लेखक-समीक्षक […]
हिंदी के इस वैश्विक मंच में 50 से अधिक देशों और भारत के प्राय: सभी राज्यों में स्थित लेखकों / विद्वानों की सक्रिय भागीदारी है। हमारा मानना है कि व्यावसायिक क्षेत्र में हिंदी का विकास ही हिंदी का भविष्य है और हम भाषा के प्रति सहानुभूति पर नहीं योगदान पर विश्वास करते हैं। आप सब का आह्वान करते हैं कि भाषा संबंधी परियोजनाओं को अपनी ऊर्जा और समय का योगदान कर मूर्त रूप दें।










‘विकसित भारत 2047’ के लिए शिक्षा पर पुणे में राष्ट्रीय मंथन
‘विकसित भारत 2047’ के लिए शिक्षा पर पुणे में राष्ट्रीय मंथन शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, नई दिल्ली की तीन दिवसीय राष्ट्रीय बैठक के प्रथम दिवस पर राष्ट्रीय संचालन समिति की बैठक एवं “विकसित भारत @2047 के लिए शिक्षा” विषयक राष्ट्रीय शैक्षिक संगोष्ठी का आयोजन श्रीमती नाथीबाई दामोदर ठाकर्सी महिला विश्वविद्यालय, पुणे एवं डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर […]
श्राउड ऑफ टूरिन का रहस्य
आस्था, इतिहास और विज्ञान के बीच एक जटिल संवाद मनीष पाण्डेय ‘मनु’, नीदरलैंड्स दुनिया के सभी धर्मों, समुदाओं और भौगोलिक क्षेत्रों के इतिहास में कुछ ना कुछ ऐसी वस्तुएँ हैं जो केवल भौतिक अवशेष नहीं बल्कि उनसे जुड़े लोगों के लिए गहन आस्था और विश्वास का प्रतिक होती हैं। ये सभी वस्तुएं विज्ञान की दृष्टि […]
तुम्हारे शब्द मुझ तक पहुँच ही कहां पाते हैं ?
अनूप भार्गव अक्सर जमाने कीज़बरदस्ती ओढाई गईतहज़ीब की चाशनी मेंफ़िसल के लौट जाते हैं , तुम्हारे शब्द मुझ तक पहुँच ही कहां पाते हैं ? तुम्हारे होठों के गोल होने से शुरु हो करशब्दों के मेरे कान तक पहुँचने का समयएक युग के समान लगता है ,किताबों में पढा था ,प्रकाश की गति ध्वनि से […]
अदब का महान सितारा डूबा : बशीर बद्र को श्रद्धांजलि
एक जाते हुए शायर के साथ तमाम रूहानी दुनियाबी दास्तान ख़त्म हो जाती है | बशीर वद्र गये उनके जाने का ग़म उनकी शायरियों में रूलाई बन कर फूट रही है। कैसे कहूं ‘अलविदा बशीर बद्र’ | वे तो ख़ुद कहते हैं कि “उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो…फिर शाम का क्या बशीर […]
साहित्य जगत से “बशीर बद्र” को देशभर से श्रद्धांजलि
साहित्य जगत से : बशीर बद्र को देशभर से श्रद्धांजलि रेखा राजवंशी (सिडनी, ऑस्ट्रेलिया) उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दोन जाने किस गली में ज़िन्दगी की शाम हो जाए | उर्दू अदब की दुनिया के अज़ीम शायर बशीर बद्र 91 की उम्र में हमारे बीच नहीं रहे । उनको किशोरावस्था से रेडियो पर […]
भारतीय भाषाओं के विकास का ब्ल्यू प्रिंट बनाने में भाषाविद् जुड़े
भारतीय भाषाओं के विकास का ब्ल्यू प्रिंट बनाने में भाषाविद् जुड़े भारतीय भाषाओं के प्रोत्साहन, संरक्षण एवं संवर्द्धन पर गंभीर चिंतन-मंथन, ठोस कार्य-योजना के प्रारूप पर विचार-विमर्श तथा उसके प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में समन्वित पहल किया जाना अत्यंत आवश्यक प्रतीत होता है। भारतीय भाषा मंच की प्राथमिकताओं में भी यह विषय प्रमुख रूप से […]
पुस्तक लोकार्पण एवं ‘सिंधु माता भजन एवं आरती’ विमोचन कार्यक्रम
पुस्तक लोकार्पण एवं ‘सिंधु माता भजन एवं आरती’ विमोचन कार्यक्रम
“यादों की ढलती शाम और बद्र का उजाला”- डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’
“यादों की ढलती शाम और बद्र का उजाला”- डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’ “उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो, न जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए…” स्टेशन के किसी कोने में बैठकर जब चाय की सुड़कती चुस्की के साथ यह शेर कानों में पिघलता है, तो भीतर कुछ टूटता है। […]
अदब के आफताब का अस्त: डॉ. बशीर बद्र को भावभीनी श्रद्धांजलि
अदब के आफताब का अस्त: डॉ. बशीर बद्र को भावभीनी श्रद्धांजलि उर्दू अदब के इतिहास में , शायरी की दुनिया को अपनी सादगी से रोशन करने वाले अज़ीम शायर, पद्मश्री डॉ. बशीर बद्र ने 91 वर्ष की आयु में भोपाल में अपनी अंतिम सांस ली।शब्दों का प्रणाम ।बशीर साहब का जाना एक जिस्म का रुखसत […]
