नृत्य में सौंदर्यबोध : जीवन का आधार विषय पर विशेष व्याख्यान आयोजित जब एक कलाकार अपनी प्रस्तुति के भावों को आत्मसात् कर लेता है, तब उसकी कला केवल अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि एक अलौकिक अनुभूति बन जाती है। वह स्वयं आनंद और भावों में सराबोर होकर अपनी कला के माध्यम से एक अद्भुत एवं मनमोहक प्रस्तुति […]
हिंदी के इस वैश्विक मंच में 50 से अधिक देशों और भारत के प्राय: सभी राज्यों में स्थित लेखकों / विद्वानों की सक्रिय भागीदारी है। हमारा मानना है कि व्यावसायिक क्षेत्र में हिंदी का विकास ही हिंदी का भविष्य है और हम भाषा के प्रति सहानुभूति पर नहीं योगदान पर विश्वास करते हैं। आप सब का आह्वान करते हैं कि भाषा संबंधी परियोजनाओं को अपनी ऊर्जा और समय का योगदान कर मूर्त रूप दें।










सिंधी साहित्य में पत्रिकाओं (कूंज, रचना और हिंदवासी) का योगदान विषयक संगोष्ठी
सिंधी साहित्य में पत्रिकाओं (कूंज, रचना और हिंदवासी) का योगदान विषयक संगोष्ठी साहित्य अकादेमी तथा इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ सिंधोलॉजी, आदिपुर, गुजरात के संयुक्त तत्त्वावधान में शनिवार, 24 अक्टूबर 2026 को इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ सिंधोलॉजी, आदिपुर, कच्छ (गुजरात) में ‘सिंधी साहित्य में पत्रिकाओं (कूंज, रचना और हिंदवासी) का योगदान’ विषयक संगोष्ठी आयोजित की जाएगी। कार्यक्रम में […]
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में डॉ. सीमा भारती की पुस्तक ‘खामोश लड़कियाँ’ पर चर्चा
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में डॉ. सीमा भारती की पुस्तक ‘खामोश लड़कियाँ’ पर चर्चा संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के जनपद संपदा विभाग द्वारा डॉ. सीमा भारती की पुस्तक ‘खामोश लड़कियाँ’ पर पुस्तक चर्चा का आयोजन किया जाएगा।
दिन विशेष प्रवासी रचना : “अमेरिका के सरकारी स्कूल में पहला दिन” – विनीता तिवारी
दिन विशेष प्रवासी रचना : “अमेरिका के सरकारी स्कूल में पहला दिन” – विनीता तिवारी प्रवासी लेखिका विनीता तिवारी का यह संस्मरण उनके अमरीकी प्रवास के दौरान जीवंत अनुभवों पर आधारित है। अमरीका में पहुँचने के बाद उन्होंने एक स्कूल की शिक्षिका के रूप में कार्य करना आरंभ किया। अमरीकी स्कूलों में उन्हें वहाँ की […]
साहित्य संवाद : नीलिमा टिक्कू
साहित्य संवाद : नीलिमा टिक्कू वातायन यूरोप के तत्वावधान में नीलिमा टिक्कू द्वारा संपादित “साहित्य समर्था” एकमात्र त्रैमासिकी के संदर्भ में साहित्य संवाद का आयोजन। संवाद में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. दुर्गाप्रसाद अग्रवाल, डॉ. चंद्रकांता, डॉ. रेखा गुप्ता एवं आचार्य राजेश कुमार सहित साहित्यकारों ने सहभागिता होगी। दिनांक एवं समय: शनिवार, 24 अक्टूबर 2026, भारतीय समयानुसार […]
दिन विशेष कथेतर : हरिप्रकाश राठी के उपन्यास ‘रमंते तत्र देवता’ की डॉ. कौशलनाथ उपाध्याय द्वारा समीक्षा
दिन विशेष कथेतर : हरिप्रकाश राठी के उपन्यास ‘रमंते तत्र देवता’ की डॉ. कौशलनाथ उपाध्याय द्वारा समीक्षा डॉ. कौशलनाथ उपाध्याय ने कथाकार हरिप्रकाश राठी के उपन्यास ‘रमंते तत्र देवता’ की समीक्षा करते हुए इसमें उस दिलचस्प कथानक की मूलभावना को सतह पर लाने की चेष्टा की है, जिसे हृदयंगम करते हुए यह अनुभव होता है […]
“एक शेर अर्ज़ किया है” का 340वाँ अंतरराष्ट्रीय तरही मुशायरा आयोजित
“एक शेर अर्ज़ किया है” का 340वाँ अंतरराष्ट्रीय तरही मुशायरा आयोजित एक_शेर_अर्ज़_किया_है, पटल के साप्ताहिक 2 तरही मिसरों पर आधारित डिजिटल_वीडियो_गोष्ठी का 340वाँ मुशायरा 17 अक्टूबर, 2026 को आयोजित किया गया। गोष्ठी की अध्यक्षता और संयोजन न्यूयॉर्क, अमेरिका से अशोक सिंह ने किया। आज का मुशायरा इन मिसरों पर आधारित था।(685) ऐ यार मगर तेरी […]
लंदन में ‘अस्मि’ का लोकार्पण — एक अविस्मरणीय शाम
लंदन में ‘अस्मि’ का लोकार्पण — एक अविस्मरणीय शाम 18 अक्टूबर मेरे जीवन की उन तारीखों में शामिल हो गया है, जिसे मैं हमेशा सहेजकर रखूँगी। लंदन के ऑक्सब्रिज में स्थित द एंट्रियम में, यूके हिंदी समिति के तत्वावधान में मेरे पहले उपन्यास ‘अस्मि’ का लोकार्पण हुआ। वर्षों से मन में पल रहे शब्दों और […]
नृत्य में सौंदर्य बोध : जीवन का आधार
नृत्य में सौंदर्य बोध : जीवन का आधार इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के कलादर्शन विभाग द्वारा ‘भारतीय कला, सौंदर्य शास्त्र एवं सांस्कृतिक धरोहर’ व्याख्यान शृंखला के अंतर्गत 22 अक्टूबर 2026 को अपराह्न 3 बजे ‘नृत्य में सौंदर्य बोध : जीवन का आधार’ विषय पर विशिष्ट व्याख्यान आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम में पद्मश्री नलिनी अस्थाना […]
दिन विशेष : महाकवि सुब्रमण्यम भारती की तमिल कविता का जमुना कृष्णराज द्वारा हिंदी अनुवाद
दिन विशेष : महाकवि सुब्रमण्यम भारती की तमिल कविता का जमुना कृष्णराज द्वारा हिंदी अनुवाद क्या तुमने माना – जमुना कृष्णराज क्या तुमने माना किदूर-दूर भटक, पेट पालबेकार की बातें करमुर्झाए मन से कठोर परिश्रम करसताने के अनेक कर्म करपके बाल सहित बुढ़ापे मेंतीखे शब्दों का शिकार बनगिर पड़ते अनेक विदूषकों-सामैं भी धराशायी हो जाऊँगा? […]
