प्रतिष्ठित कवयित्री अलकनंदा साने हिन्दी और मराठी की सिद्ध साहित्यकार की अनुवादित कविताएं उन्हें मध्य प्रदेश की पहली हिन्दी पत्रकार होने का गौरव प्राप्त है। जन्मना विरासत में मिली मातृभाषा मराठी और वातावरण – संस्कार से मिली हिन्दी,इन दोनों भाषाओं पर उनका प्रभुत्व है। अलकनंदा जी स्त्री विमर्श की रचनाकार हैं। एक आम स्त्री का […]
हिंदी के इस वैश्विक मंच में 50 से अधिक देशों और भारत के प्राय: सभी राज्यों में स्थित लेखकों / विद्वानों की सक्रिय भागीदारी है। हमारा मानना है कि व्यावसायिक क्षेत्र में हिंदी का विकास ही हिंदी का भविष्य है और हम भाषा के प्रति सहानुभूति पर नहीं योगदान पर विश्वास करते हैं। आप सब का आह्वान करते हैं कि भाषा संबंधी परियोजनाओं को अपनी ऊर्जा और समय का योगदान कर मूर्त रूप दें।










बुद्धिवादी (व्यंग्य) : हरिशंकर परसाई
बुद्धिवादी (व्यंग्य) : हरिशंकर परसाई आशीर्वादों से बनी जिंदगी है ।बचपन में एक बूढ़े अंधे भिखारी को उन्होंने हाथ पकड़कर सड़क पार करा दिया था । अंधे भिखारी ने आशीर्वाद दिया- बेटा, मेरे जैसे हो जाना । अंधे भिखारी का मतलब लम्बी उम्र से रहा होगा । पर उन्होंने दूसरा मतलब निकाला और अध्यापक हो […]
अपनी अपनी बीमारी (व्यंग्य) : हरिशंकर परसाई
अपनी अपनी बीमारी (व्यंग्य) : हरिशंकर परसाई हम उनके पास चंदा माँगने गए थे। चंदे के पुराने अभ्यासी का चेहरा बोलता है। वे हमें भाँप गए। हम भी उन्हें भाँप गए। चंदा माँगनेवाले और देनेवाले एक-दूसरे के शरीर की गंध बखूबी पहचानते हैं। लेनेवाला गंध से जान लेता है कि यह देगा या नहीं। देनेवाला […]
पुराना खिलाड़ी (व्यंग्य) : हरिशंकर परसाई
पुराना खिलाड़ी (व्यंग्य) : हरिशंकर परसाई सरदारजी जबान से तंदूर को गर्म करते हैं। जबान से बर्तन में गोश्त चलाते हैं। पास बैठे आदमी से भी इतने जोर से बोलते हैं, जैसे किसी सभा में बिना माइक बोल रहे हों। होटल के बोर्ड पर लिखा है – ‘यहाँ चाय हर वक्त तैयार मिलती है।’ नासमझ […]
तुम्हारे लिए मुस्कराए हुए हूँ (कविता)
तुम्हारे लिए मुस्कराए हुए हूँ (कविता) हृदय में बहुत कुछ छुपाये हुए हूँ तुम्हारे लिए मुस्कराए हुए हूँ . क्या क्या नही दुःख उठाया है मैंने दुपहरी को सिर पर गुजरा है मैंने बहुत भीगता मैं रहा शीत में भी मगर फिर भी मैं मुस्कराए हुए हूँ। बहुत तारे टूटे हैं आँखों के आगे कई […]
धीरज आखिर टूट गया (कविता)
धीरज आखिर टूट गया (कविता) और छुपाता दर्द हृदय में अब कितना दर्द हृदय की सब सीमायें लांघ गया कितने ज्वार उठे और कितने लौट गये कितने मोती तट बंधों पर बिखर गये गहराई सागर की फिर भी गहरी थी बेशक कितने झंझा आ कर चले गये पर धरती की […]
चंद्रभान ‘राही’ के उपन्यास ‘अंतिम समय का सच’ और पत्रिका ‘अमृत दर्पण’ का गरिमामयी लोकार्पण सम्पन्न
चंद्रभान ‘राही’ के उपन्यास ‘अंतिम समय का सच’ और पत्रिका ‘अमृत दर्पण’ का गरिमामयी लोकार्पण सम्पन्न न्यू भूमिका साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था के तत्वावधान में आज एक भव्य साहित्यिक समारोह का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में वरिष्ठ साहित्यकार चंद्रभान ‘राही’ द्वारा रचित उपन्यास और त्रैमासिक पत्रिका ‘अमृत दर्पण’ का लोकार्पण एवं सारगर्भित साहित्य चर्चा […]
जेल समाधि – पुष्पा सिन्हा (पुस्तक लोकार्पण एवं विचार गोष्ठी)
जेल समाधि – पुष्पा सिन्हा (पुस्तक लोकार्पण एवं विचार गोष्ठी)
वात्सल्य वार्षिकोत्सव पुस्तक लोकार्पण एवं सम्मान समारोह
“भारत भाग्य विधाता” और “संस्कारों की उड़ान” – डॉ. कविता मल्होत्रा
डॉ. संदीप अवस्थी को ओरछा में ‘श्री राम पदक’ से सम्मानित
डॉ. संदीप अवस्थी को ओरछा में ‘श्री राम पदक’ से सम्मानित देश भर में अपने मौलिक विचारों और लेखन से अजमेर का नाम निरंतर ऊंचा कर रहे डॉ संदीप अवस्थी को एक और विशेष सम्मान मिला। अवसर था श्री राम राजा के प्रमुख स्थल ओरछा में आयोजित पांच दिवसीय श्री राम महोत्सव और अंतरराष्ट्रीय सेमिनार […]
