भावना ( कविता ) : डॉक्टर शिवनंदन यादव

मैंने पूछा कि भावना क्या है?
कौन-सा रूप, धारणा क्या है?
भावना दुलार, नेह, ममता है,
मीरा का गीत, सूर-कविता है;

भावना मिलन-सांझ, सरस प्रेम-पाती है
भावना वियोग में बरबस रुलाती है;
भावना प्राण की सहेली है
जन्म से साथ खेली- खेली है;

भावना हँसती है, रोती है,गाती है
भावना जीवन को, जीना सिखाती है;
भावना-रिक्त है, तो जीवन क्या है!
भावना -हीन है तो मानव क्या है!

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