शब्द चिंतन मोड पर ( कविता ) : अनीता वर्मा

जो हो रहा है
वो तो होना ही था
पर जो नहीं चाहिए होना
उस होने के होने का
क्या होना और क्या नहीं होना
अर्थहीन हो चुके संवाद
कहने को बहुत कुछ
ना कहने भर की चुभन
चाह कर भी विरोध ना करना
विरोध करके भी चुप्पी
बहुत कुछ अनकहा
चुप्पी और चयन की लड़ाई
ये समय का व्यवधान है
या फिर भीतर छिपा डर
स्त्री चुप है
लड़कियाँ मुखर है
दोनों कहना चाहती हैं
अपने अपने समय का सच
स्त्री कुछ नहीं कह सकती
लड़कियाँ कहकर भी नहीं कह पाती
दोनों बात करती हैं
चैट जी पी टी पर
संवाद अर्थहीन है
और शब्द चिंतन मोड में ।

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