जन्मदिन विशेष (1 सितंबर) में ध्रुव गुप्ता की ग़ज़ल
कहीं बिल्कुल पास तुम्हारे, जंगल जहां ख़त्म होता है, मौसम जो कभी नहीं आता (सभी कविता संग्रह); एक ज़रा सा आसमां, मौसम के बहाने, मुझमें कुछ है जो आईना सा है (सभी ग़ज़ल संग्रह) के रचियता ध्रुव गुप्ता के जन्मदिन पर आज विशेष। साभार कविता कोश

ग़ज़ल
ख़ुद से बच के निकल गए होते
अपने दिन भी बदल गए होते
हमको कोई कमी नहीं थी वहां
हम अगर सर के बल गए होते
ख़ुद से कुछ राबता रहा अपना
वरना जड़ से उखड़ गए होते
हम न चलते जो फ़ासले लेकर
सबको आदत सी पड़ गए होते
फिर तेरे दर पे इसलिए न गए
आज भी कल पे टल गए होते
हम भी आवारगी में बच निकले
दुनियादारी में सड़ गए होते
रूह को जाने क्या तलाश रही
दिल कहीं भी बहल गए होते
जाने किस आसमान में है ख़ुदा
हमसे मिलता तो लड़ गए होते
