Category: व्यंग्य

श्रीमती गजानंद शास्त्रिणी (व्यंग्य) : सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’

श्रीमती गजानंद शास्त्रिणी (व्यंग्य) : सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला‘ श्रीमती गजानन्‍द शास्त्रिणी श्रीमान् पं. गजानन्‍द शास्‍त्री की धर्मपत्‍नी हैं। श्रीमान् शास्‍त्री जी ने आपके साथ यह चौथी शादी की है, धर्म…

मेंढकी का ब्याह ( व्यंग्य ) : वृंदावनलाल वर्मा

मेंढकी का ब्याह ( व्यंग्य ) : वृंदावनलाल वर्मा उन ज़िलों में त्राहि-त्राहि मच रही थी। आषाढ़ चला गया, सावन निकलने को हुआ, परन्तु पानी की बूँद नहीं। आकाश में…

बुद्धिवादी (व्यंग्य) : हरिशंकर परसाई

बुद्धिवादी (व्यंग्य) : हरिशंकर परसाई आशीर्वादों से बनी जिंदगी है ।बचपन में एक बूढ़े अंधे भिखारी को उन्होंने हाथ पकड़कर सड़क पार करा दिया था । अंधे भिखारी ने आशीर्वाद…

अपनी अपनी बीमारी (व्यंग्य) : हरिशंकर परसाई

अपनी अपनी बीमारी (व्यंग्य) : हरिशंकर परसाई हम उनके पास चंदा माँगने गए थे। चंदे के पुराने अभ्यासी का चेहरा बोलता है। वे हमें भाँप गए। हम भी उन्हें भाँप…

पुराना खिलाड़ी (व्यंग्य) : हरिशंकर परसाई

पुराना खिलाड़ी (व्यंग्य) : हरिशंकर परसाई सरदारजी जबान से तंदूर को गर्म करते हैं। जबान से बर्तन में गोश्त चलाते हैं। पास बैठे आदमी से भी इतने जोर से बोलते…

इश्क का ऑडिट (व्यंग्य)  

इश्क का ऑडिट (व्यंग्य) विक्रम टेंट के कोने में अपने लैपटॉप की रोशनी में किसी मुजरिम की तरह दुबका बैठा था। अनन्या ने हाथ में मशाल जैसी टॉर्च लेकर प्रवेश…

डियर मोमोज (व्यंग्य)

डियर मोमोज (व्यंग्य) मोमोज के उस सफेद, चिपचिपे और रहस्यमयी व्यक्तित्व की शारीरिक संरचना किसी दार्शनिक गुत्थी से कम नहीं है, जिसे देखकर लगता है कि मैदा अपनी मुक्ति के…

पक्के रंग और कच्चे मन के किस्से (व्यंग्य)

पक्के रंग और कच्चे मन के किस्से (व्यंग्य) हमारे यहाँ होली कैलेंडर की तारीखों से नहीं, बल्कि मोहल्ले की उस पुरानी दीवार पर पड़ने वाले नीले-लाल धब्बों से शुरू होती…

मैकाले की आत्मा – (व्यंग्य कथा)

मैकाले की आत्मा डॉ. रवि शर्मा ‘मधुप’ मैकाले तो आम आदमी की तरह वक्त आने पर नश्वर देह को त्यागकर इस संसार से कूच कर गए। परंतु आत्मा तो अजर-अमर…

मजबूरी का सौदा – (व्यंग्य कथा)

मजबूरी का सौदा डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’ गौरीपुरा गाँव के ठीक बीचों-बीच, बरगद के पेड़ के नीचे, गिरधारी की छोटी-सी दुकान थी। दुकान क्या थी, एक फटी-पुरानी चारपाई, जिस…

प्रेम का लाइसेंस – एक राष्ट्रीय योजना – (व्यंग्य आलेख)

प्रेम का लाइसेंस – एक राष्ट्रीय योजना डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’ देश में समस्याएँ बहुत हैं — बेरोज़गारी, महंगाई, भ्रष्टाचार, और अब एक नई राष्ट्रीय आपदा: आधुनिक प्रेम, जिसे…

अंतिम उम्मीद का आखिरी टिकट – (व्यंग्य कथा)

अंतिम उम्मीद का आखिरी टिकट डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’ पुराने शहर के उस कोने में, जहाँ सूरज की किरणें भी सरकारी फाइलों की तरह देर से पहुँचती थीं, एक…

एक खाली सिंहासन का दुःख – (व्यंग्य कथा)

एक खाली सिंहासन का दुःख डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’ जनहित महासेवा सद्भाव समिति, जिसका नाम सुनते ही किसी के भी मन में ‘जनसेवा’ से अधिक ‘महा’ शब्द की विराटता…

बाबा जी राम राम – (व्यंग्य कथा)

बाबा जी राम राम – नूपुर अशोक, ऑस्ट्रेलिया मोहनदास को स्वर्ग में रहते हुए सत्तर से भी ज़्यादा वर्ष हो चुके थे। धर्मराज सत्तर साल से उन का रिपीट टेलीकास्ट…

डॉलर वाले बैंगन जी – (व्यंग्य)

डॉलर वाले बैंगन जी – नूपुर अशोक देशी आदमी जब दोस्तों को इम्प्रेस करना चाहता है तो उन्हें पिज़्ज़ा और बर्गर खिलाता है। वही देशी आदमी जब विदेश पहुँचता है…

ऑपरेशन अंग्रेज़ी – (व्यंग्य)

ऑपरेशन अंग्रेज़ी – नूपुर अशोक “नारायण- नारायण” – कहते हुए नारद मुनि ने प्रवेश किया – “प्रभुगण किस चिंता से त्रस्त हैं?” नारद जी ने अपनी बात को स्पष्ट करते…

आप कौन हैं? – (व्यंग्य कथा)

आप कौन हैं? – डॉ. सच्चिदानंद जोशी दिवाकर जी के आमंत्रण पर लिटरेचर फेस्टिवल के एक सत्र में ‘सोशल मीडिया पर बढ़ती अश्लीलता’ विषय वक्ता के तौर पर जाना था।…

नीचता अब नीति है, ऊंचाई अब गिरावट से नापी जाती है – (व्यंग्य)

नीचता अब नीति है, ऊंचाई अब गिरावट से नापी जाती है – डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’ सुबह का वक्त था, मगर मोहल्ले में अंधेरा छाया हुआ था। अंधेरा बिजली…

दाढ़ी – (व्यंग्य)

दाढ़ी – रवि ऋषि मेरी जो गिनी चुनी आदतें मेरी पत्नी को पसंद हैं, उनमे मेरी बढ़ी हुई दाढ़ी नहीँ है। और सफेद दाढ़ी तो बिलकुल नहीँ। जबकि हमें दाढ़ी…

विपक्ष की कलम से – (व्यंग्य)

विपक्ष की कलम से – अमरेन्द्र कुमार, अमेरिका आज तक आपने सरकार की बातें ही सुनी हैं। आज मैं विपक्ष आपसे इस लेख के माध्यम से कुछ साझा करना चाहता…

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