जन्मदिन विशेष में भारतेंदु हरिश्चंद्र की कविता “अब प्रीति करी तौ निबाह करौ”

अब प्रीति करी तौ निबाह करौ
अपने जन सों मुख मोरिए ना ।
तुम तो सब जानत नेह मजा
अब प्रीति कहूँ फिर जोरिए ना ।
‘हरिचंद’ कहै कर जोर यही
यह आस लगी तेहि तोरिए ना ।
इन नैनन माहँ बसो नित ही
तेहि आँसुन सों अब बोरिए ना ।
