दिन विशेष ( कविता ) में सांद्रा लुटावन की कविताएँ
सूरीनाम – दक्षिण अमेरिका से सांद्रा लुटावन की कविताएँ। उनकी कविताओं की अनगढ़ता पूरे भोलेपन के साथ देखी जा सकती है। भाषा भी सरल है और काव्य भी। जैसे यह किसी सरलमना कवयित्री का भाव है। – स्वरांगी साने

गहराई के मोती
समुद्र की हर लहर एक संदेश सुनाती है,
हर गहराई में एक नई उम्मीद छिपी होती है।
किनारे पर तो केवल रेत दिखाई देती है,
पर गहराई में अनमोल मोती मिलते हैं।
जो साहस के साथ आगे बढ़ता है,
वही अपनी मंज़िल तक पहुँचता है।
धैर्य और मेहनत कभी व्यर्थ नहीं जाते,
एक दिन अवश्य अपना रंग दिखाते हैं।
जीवन भी समुद्र के समान है,
उसकी गहराई को समझना पड़ता है।
जो कठिनाइयों से घबराता नहीं,
वही जीवन के सच्चे मोती पाता है।
हर संघर्ष एक नई सीख दे जाता है,
हर मेहनत एक नया फल लाती है।
जो गहराई में उतरने का साहस करता है,
वही जीवन के अनमोल मोती पाता है।
बुढ़ापे का सुनहरा समय
जीवन की लंबी यात्रा के बाद
आता है एक शांत और सुहाना पड़ाव।
यह बुढ़ापा नहीं, अनुभवों का ख़ज़ाना है,
जहाँ हर साँस में जीवन का अफ़साना है।
अब न घड़ी की सुइयों से दौड़ लगानी है,
न किसी को कुछ साबित करके दिखाना है।
जब नींद आए, चैन से सो जाते हैं,
जब मन चाहे, मुस्कुराते हुए उठ जाते हैं।
दिन अब किसी दफ़्तर के नहीं,
न ही ज़िम्मेदारियों के बोझ तले दबे हैं।
समय अब अपना साथी बन गया है,
हर पल सुकून का गीत सुनाने लगा है।
कभी आँगन में बैठकर धूप सेंकते हैं,
कभी ठंडी हवाओं के संग सपने बुनते हैं।
कभी एक प्याली चाय में पूरा दिन समा जाता है,
कभी बच्चों की हँसी से घर खिल उठता है।
अब जल्दी नहीं, केवल ठहराव है,
हर पल में जीवन का सच्चा भाव है।
जो कभी नज़रअंदाज़ हो गया था,
आज वही सबसे अनमोल उपहार है।
बुढ़ापा सिखाता है कि धन से बड़ा संतोष होता है,
और सफलता से बड़ा अपनों का साथ होता है।
प्रेम बाँटने से कभी कम नहीं होता,
और दया से बड़ा कोई धर्म नहीं होता।
जीवन भर जो दूसरों के लिए चलते रहे,
अब अपने मन की राहों पर भी चलना सीख लिया।
हर सुबह ईश्वर का आशीर्वाद लगती है,
हर शाम कृतज्ञता का दीप जलाती है।
बुढ़ापा अंत नहीं, एक नई शुरुआत है,
जहाँ मन आज़ाद है और आत्मा प्रसन्न है।
यह समय मेहमान बनकर नहीं आता,
बल्कि जीवन का सबसे बुद्धिमान मित्र बन जाता है।
इसलिए इस अवस्था को प्रेम से अपनाइए,
हर दिन को उत्सव बनाइए।
मुस्कान बाँटिए, यादें रचिए,
और जीवन के इस सुनहरे अध्याय को हृदय से जी लीजिए।
