सर्वेश की पुस्तक ‘कैमरा वालियाँ’ की मनोज अबोध द्वारा समीक्षा
पुस्तक परिचय
“कैमरे वालियाँ”
महिला फोटोग्राफरों की रोमांचक दुनिया
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जीवन संघर्षों में घिसी-तपी महिला का नाम है: सर्वेश। कद-काठी और बोलचाल में दबंग दिखने वाली सर्वेश वस्तुतः दिल की बहुत कोमल हैं। वैसे भी संवेदनशीलता एक बेहतरीन फोटोग्राफर का स्वाभाविक गुण माना गया है । सर्वेश भी ऐसी ही संवेदनशील महिला फोटोग्राफर हैं जिनके नाम बहुत से साहसिक काम और यादगार फोटो दर्ज हैं।
“कैमरे वालियाँ”(महिला फोटोग्राफरों की रोमांचक दुनिया) सर्वेश की किताब का नया संस्करण है जिसमें वे भारत की तमाम जानी-अनजानी, सिद्ध-प्रसिद्ध महिला फोटोग्राफरों के संघर्ष, जिजीविषा और महत्वपूर्ण चित्र-उपलब्धियों को पाठकों के सामने लाने का श्रमसाध्य प्रयास करती हैं। भारत की पहली महिला फोटोग्राफर होमाई व्योरवाला से शुरू हुआ उनका यह सफ़र सरस्वती चक्रवर्ती, कृष्णा राय, उषा क़दम, शुचेता दास, रेणुका पुरी,अनीता खेमका, रूहानी कौर, प्रियंका पाराशर, गीतिका तालुकदार, इंदु बंसल डांग, जयश्री पुरी,सुमन कंसारा, पूजा आर्य, सुमि देवगन, नेहा बिष्ट, मीता अहलावत, श्रिया पाटिल, कीर्ति सुर्वे,अश्विनी सावंत, अनुजा गुप्ता, पुनीत चंडोक, पूनम शिंदे, सौम्या खंडेलवाल, जसजीत प्लाहा,अदिति साहा ,रितेश सिंह, अंजली सिन्हा,रूबी सरकार, देबो सुष्मिता, अर्पिता चंद्रा,सोनाली पाल चौधरी और मनीषा मंडल से होता हुआ स्वयं खुद के ‘संघर्ष से सम्मान’ पर समाप्त होता है।
पुरुषों के वर्चस्व वाले प्रेस-फोटोग्राफी या फोटो-पत्रकारिता के क्षेत्र में महिला फोटोग्राफरों की यह दमदार धमक कई मायनों में बहुत महत्वपूर्ण है। इन महिला फोटोग्राफरों के जुनून, संघर्ष और साहस को पढ़ना रोचक होने के साथ-साथ रोमांचक भी है जो आधी आबादी के आगे बढ़ने और खुद को बेहतर सिद्ध करने के सफल प्रयासों के परिपेक्ष्य में भी देखा जाना चाहिए। एक सफ़ल फोटो-पत्रकार बनने के लिए इन महिलाओं की अदम्य इच्छा शक्ति के आगे भीड़ और सहकर्मियों की निरुत्साहित करती छींटाकशी किस तरह परास्त होती है, यह सर्वेश ने बहुत सटीक शब्दों में दिखाया है।
इस पुस्तक की प्रामाणिकता और तथ्यात्मकता इसी से सिद्ध हो जाती है कि इसकी लेखिका स्वयं एक सफल प्रेस फोटोग्राफर है । इसीलिए वे इस क्षेत्र में कदम रखने वाली महिलाओं के संघर्ष, उनकी परेशानियों और जीत को बख़ूबी पहचानती हैं। ये महिला फोटोग्राफर सिर्फ फोटोग्राफर ही नहीं हैं,बल्कि उनके भीतर संवेदना और रचनात्मकता का एक दूसरा जीता-जागता संसार भी साँस ले रहा है। पाठक इससे रू-ब-रू इस किताब को पढ़ने के बाद ही हो सकता है।
पुस्तक की भूमिका में वरिष्ठ पत्रकार मृणाल पाण्डेय सर्वेश के संघर्ष की तस्दीक करते हुए कहती हैं- “उसके अनथक उत्साह, नारी दुर्लभ साहस और रचनात्मकता के लिए मेरे मन में गहरा आदर है” वहीं ख़ुद सर्वेश भी स्वीकार करती हैं कि ऊपर से बड़ा मॉडर्न और बोल्ड दिखने वाला फोटोग्राफी का यह संसार अंदर से कितना रूढ़िवादी और स्त्रियों के प्रति पूर्वाग्रह से ग्रस्त है, मैं इसे वर्षों यहां काम करने के बाद जान पाई।
एक सफल पेशेवर फ़ोटोग्राफ़र के तौर पर कई प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त सर्वेश अपने बारे में थोड़ा विस्तार से बताते हुए जीवन के कठिन समय को याद करती हैं और प्रश्न उठाती हैं। उनका प्रश्न सामाजिक रूढ़ियों और परिवार की सोच पर हमें सोचने पर विवश करता है । अपने संघर्ष और दृढ़ संकल्प को याद करते हुए सर्वेश इस पेशे और कैमरे को धन्यवाद देना नहीं भूलतीं, जब वह कहती हैं-इस कैमरे ने मुझे देश-विदेश घुमाया। हिमालय की 17000 से भी ऊपर की ऊंचाइयों से लेकर कोयले की खदानों तक पहुंचाया। कारगिल युद्ध, उत्तरकाशी, गुजरात का भूकंप, सीतामढ़ी का दंगा, गुजरात और बुंदेलखंड का सूखा जैसे न जाने कितने महत्वपूर्ण काम करने के अवसर मिले। अगर आपका शौक ही व्यवसाय बन जाए तो जिंदगी जीने का मजा ही अलग है।
सही भी है, अपने शौक़ को पेशा बनाने वाली सर्वेश समेत 34 महिला फोटोग्राफरों में से हम लोग कितनों को जानते या सराहते हैं? लेकिन इस किताब को पढ़ने के बाद निश्चित ही आपको इन महिला फोटोग्राफरों पर गर्व का अनुभव होगा। साथ ही, इस रोमांचक क्षेत्र में आने की इच्छुक महिलाओं के लिए भी यह पुस्तक एक सटीक रौशनी वाली टॉर्च का काम करेगी, ऐसा मेरा विश्वास है।
पुस्तक: कैमरे वालियाँ (महिला फोटोग्राफरों की रोमांचक दुनिया)
लेखिका: सर्वेश
पृष्ठसंख्या:170
मूल्य:₹350
प्रकाशक: वाणी प्रकाशन ग्रुप
मनोज अबोध
ग्रेटर नोएडा-201310
मो०9319317089
manojabodh63@gmail.com


