इंटरनेट की सड़क पर – ( कविता )
हमने इंटरनेट की भीड़-भरी
सड़क पर ढूँढ ही लिया
एक छोटा-सा कोना,
बतियाने के लिये।
अब परीक्षा है हमारी
कि बिना चेहरा देखे,
बिना सूँघे,
बिना छुए,
मैं..
तुम्हारे भावों को,
और तुम,
मेरे भागते भावों को कह दो–
“धप्पा”
इस तरह बनाना शुरू करें
सड़क के बीचों बीच उगाये
अपनी दोस्ती के पेड़ पर,
बातों का घोंसला
तिनका-तिनका
… आओ…!!
