दिन विशेष कविता : खोज – अलकनंदा साने
मत करो वर्णमाला में शामिल
किसी संधि में जगह मत दो
समास में रहने दो अपने पीछे
मंजूर है.
एक बिनती है
तत्सम ही रहने दो
अपभ्रंश मत बनाओ .
मुश्किल हो जाता है
अपभ्रंश की जड़ें ढूँढना !!!
हिंदी का वैश्विक मंच
मत करो वर्णमाला में शामिल
किसी संधि में जगह मत दो
समास में रहने दो अपने पीछे
मंजूर है.
एक बिनती है
तत्सम ही रहने दो
अपभ्रंश मत बनाओ .
मुश्किल हो जाता है
अपभ्रंश की जड़ें ढूँढना !!!